भोपाल पर निबंध – Essay on Bhopal in Hindi

Essay on Bhopal in Hindi

इस पोस्ट में हम भोपाल पर निबंध (Essay on Bhopal in Hindi) के माध्यम से भोपाल के बारे में जानेंगे। भोपाल भारत देश में मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है और भोपाल जनपद का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। भोपाल को राजा भोज की नगरी तथा ‘झीलों की नगरी’ भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ कई छोटे-बड़े तालाब हैं। यह नगर अचानक चर्चा में तब आ गया। जब 1984 में अमरीकी कम्पनी, यूनियन कार्बाइड से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से लगभग 20,000 लोग मारे गये थे।

भोपाल में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) का एक कारखाना है। हाल ही में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र ने अपना दूसरा ‘मास्टर कण्ट्रोल फ़ैसिलटी’ यहाँ स्थापित किया है। भोपाल में ही भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भी है जो भारत में वन प्रबन्धन का एकमात्र संस्थान है।

साथ ही भोपाल उन छह नगरों में से एक है जिनमे 2003 में भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया था जोकि वर्ष 2015 से कार्यशील है। इसके अतिरिक्त यहाँ अनेक विश्वविद्यालय हैं जैसे कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय आदि।

इसके अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय संस्थान जैसे मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान इंजीनियरिंग महाविद्यालय, गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय, नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी तथा अनेक शासकीय एवं पब्लिक स्कूल हैं। भोपाल में कोलार तथा केरवा नदियाँ हैं। बेतवा नदी का उद्गम स्थल कोलाश्र बाँध के पास झिरी में है।

भोपाल पर निबंध – Essay on Bhopal in Hindi

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्राकृतिक खूबसूरती भी है और समृद्ध अतीत भी। यह शहर प्राचीनता और नवीनता का अद्भुत संगम है। ग्यारहवीं सदी के भोजपाल तथा तत्पश्चात भूपाल नामक इस नगर को परमारवंशी राजा भोज ने बसाया था।

एक बहुरंगी तस्वीर पेश करता है। एक ओर पुराना शहर है जहाँ लोगों की चहल-पहल के बीच बाजार है, पुरानी सुंदर मस्जिदें तथा महल हैं। दूसरी तरफ नया शहर बसा हुआ है। जिसके सुंदर पार्क और हरे-भरे वृक्ष गहरी राहत देते हैं। भोपाल पाँच पहाड़ियों पर बसा है तथा इसमें दो झीलें हैं। यहाँ की जलवायु सम है। कहा जाता है कि भोपाल को अफगान सैनिक दोस्त मोहम्मद ने बसाया था।

दर्शनीय स्थल : जामा मस्जिद

इस खूबसूरत मस्जिद की विशेषता हैं सुनहरी मीनारें। इसे 1837 में कुदसिया बेगम ने बनवाया था।

मोती मस्जिद

दिल्ली की जामा मस्जिद के आधार पर बनी इस मस्जिद को कुदसिया बेगम की बेटी सिकंदर जेहन ने 1860 में बनवाया था। शौकत महल और सदर मंजिलशौकत महल शहर के बीचोंबीच चौक क्षेत्र में स्थित है।

यह भवन निर्माण कला का अनोखा नमूना है। आस-पास के इस्लामी भवनों से यह बिल्कुल अलहदा दिखाई देती है। कारण यह है कि इसे एक फ्रांसीसी द्वारा डिजाइन किया गया था। पुनर्जागरण काल की शैली के दर्शन इसमें सहज ही किए जा सकते हैं। इसी के पास है सदर मंजिल जो भोपाल के शासकों द्वारा बनवाया गया सार्वजनिक हॉल है।

ताज-उल-मस्जिद

यह एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इसे नवाब शाहजेहन ने बनवाया था। इसके चारों ओर दीवार है और बीच में एक तालाब है। इसका प्रवेश द्वार दो मंजिला है। जिसमें चार मेहराबें हैं और मुख्य प्रार्थना हॉल में जाने के लिए 9 प्रवेश द्वार हैं। पूरी इमारत बेहद खूबसूरत है। यहाँ लगने वाला तीन दिन का इज्तिमा पूरे देश के लोगों को आमंत्रित करता है।

गोहर महल

शौकत महल के सामने बड़ी झील के किनारे स्थित वास्तुकला का यह खूबसूरत नमूना कुदसिया बेगम के काल का है जिन्हें गोहर बेगम भी कहा जाता था। यह हिंदू और मुगल कला का अद्भुत संगम है।

भारत भवन

यह भारत की अनूठी राष्ट्रीय संस्था है। मुख्य रूप से यह प्रदर्शन कला और दृश्य कला का केंद्र है। इसे चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया है। विशाल क्षेत्र में फैले इस भवन के आस-पास का प्राकृतिक सौंदर्य इसे और भी भव्य बनाता है।

यहीं पर एक कला संग्रहालय, कला दीर्घा, फाइन आर्ट के लिए कार्यशाला, एक थिएटर, अंतरंग और बहिरंग ऑडिटोरियम, रिहर्सल कक्ष, भारतीय कविताओं का पुस्तकालय, शास्त्रीय और लोक संगीत संग्रहालय भी है। यह सोमवार के अलावा पूरे सप्ताह दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय

यह एक अनूठा संग्रहालय है जो 200 एकड़ में श्यामला हिल्स पर बड़ी झील के सामने फैला है। यह एक प्रागैतिहासिक स्थल पर है और विश्व में अपनी तरह का एक ही संग्रहालय है जो प्रागैतिहासिक चित्रकला से सज्जित गुफाओं के समीप है। और इस तरह से यह वस्तुओं और परंपराओं से जीवंत रूप से जुड़ा हुआ है।

लोक एवं आदिवासी कला व परंपरा यहाँ इर्द-गिर्द ही मौजूद हैं। यहाँ आदिवासी, समुद्र किनारे, रेगिस्तान और हिमालय के आवासों के नमूने भी बनाए गए हैं। यहाँ संग्रहालय में पुस्तकालय, दृश्य-श्रृव्य आर्काइव, कंप्यूटरीकृत कक्ष व प्रजातीय नमूनों को देखा जाता है।

शासकीय पुरातात्विक संग्रहालय

यहाँ मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कला के खूबसूरत नमूने एकत्रित करके रखे गए हैं। संग्रहालय सोमवार को बंद रहता है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर और संग्रहालय

यह अरेरा हिल्स पर स्थित है। इससे लगा हुआ एक संग्रहालय है जहाँ मध्यप्रदेश के रायसेन, सीहोर, मंदसौर और शहडोल जिले से एकत्रित कला नमूनों को रखा गया है। यह संग्रहालय भी सोमवार को छोड़कर पूरे सप्ताह 9 बजे से 5 बजे तक खुला रहता है।

वन-विहार

बड़ी झील से लगी पहाड़ी पर यह सफारी उद्यान स्थित है। यह 445 हैक्टेयर में फैला है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच आप विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और माँसाहारी प्राणियों को देखने का आनंद उठा सकते हैं। यह मंगलवार को छोड़कर हर दिन सुबह 7 से 11 और 3से 5 बजे शाम खुला रहता है।

क्षेत्रीय विज्ञान केंद्रयह मूल रूप से विज्ञान संग्रहालय है जो श्यामला हिल्स की खूबसूरती के बीच स्थित है। यहाँ इन्वेंशन और फन साइंस गैलरी हैं और एक तारामंडल नाम का प्लेनेटेरियम भी है। यह सोमवार को छोड़कर हर दिन सुबह 10.30 से 6.30 तक खुला रहता है।

चौक

Essay on Bhopal in Hindi: शहर के बीच स्थित चौक पुरानी मस्जिद, हवेलियाँ अतीत की स्मृति दिलाते हैं। सँकरी गलियों में स्थित दुकानें हैं जिनमें शिल्प के खजाने खुले हुए हैं। यहाँ आप चाँदी के आभूषण, बीडवर्क, कढ़ाई का काम और सीक्वन का काम खूबसूरत अंदाज में देख और खरीद सकते हैं। छोटी झील और बड़ी झील बड़ी झील छोटी झील से एक ओवरब्रिज से अलग होती है। म.प्र. पर्यटन बोट क्लब बड़ी झील में नौकायन भी करवाता है।

एक्वेरियम

छोटी झील में एक मछली के आकार का एक्वेरियम है।

कैसे पहुँचे?

वायु सेवा- दिल्ली ग्वालियर, इंदौर और मुंबई से भोपाल के लिए नियमित विमान सेवा है।रेल सेवा- भोपाल, दिल्ली-मद्रास मेन लाइन पर है। मुंबई से इटारसी और झाँसी के रास्ते दिल्ली जाने वाली मुख्य गाड़ियाँ भोपाल होकर जाती हैं।

सड़क मार्ग- भोपाल तथा इंदौर, मांडू, उज्जैन, खजुराहो, पचमढ़ी, ग्वालियर, साँची, जबलपुर और शिवपुरी के बीच नियमित बस सेवाएँ हैं।
ठहरने के लिए- मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटल तथा निजी होटल हैं।

उम्मीद करता हु आपको भोपाल पर निबंध (Essay on Bhopal in Hindi) के द्वारा भोपाल के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी मिल गयी होगी। अगर आप कुछ पूछना या जानना चाहते है, तो आप हमारे फेसबुक पेज पर जाकर अपना सन्देश भेज सकते है। हम आपके प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे। इस पोस्ट को पढने के लिए आपका धन्यवाद!