पटना पर निबंध – Essay on Patna in Hindi

Essay on Patna in Hindi

आज हम इस पोस्ट में पटना पर निबंध (Essay on Patna in Hindi) के बारे में बात करेंगे। पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र,पुष्पपुरी, कुसुमपुर था। पटना शहर का ऐतिहासिक महत्व है। पटना संसार के गिने-चुने उन विशेष प्राचीन नगरों में से एक है जो अति प्राचीन काल से आज तक आबाद है। ईसा पूर्व मेगास्थनीज(350 ईपू-290 ईपू) ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी अपनी पुस्तक इंडिका में इस नगर का उल्लेख किया है। तो चलिए पटना पर निबंध (Essay on Patna in Hindi) के लेख को विस्तार से देखते है।

पटना पर निबंध – Essay on Patna in Hindi

पटना, जो कि बिहार की राजधानी है, उसका नाम आते ही ज़ेहन में गंदी सड़कें, बेकार राजनीति और सार्वजनिक वाहनों में ठसे हुए लोगों की छवि, दिमाग में उभरने लगती है। पूरे भारत में बिहार की छवि को बेहद बेढंगे तरीके से पेश किया गया है। लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि आर्यभट्ट हों या पणिनी, चाणक्‍य हों या कालीदास, सभी लोग पटना से ही थे, जिन्‍हे भारतीय इतिहास में ज्ञान के क्षेत्र में धुंरधर माना जाता है।

आपको इस शहर में आने के बाद धर्म और संस्‍कृति का मिला-जुला रूप देखने को मिलेगा। भारत की असल छाप देखनी है तो पटना की सैर करना आवश्‍यक है।

कुछ ऐतिहासिक तथ्य

  • पटना की स्थापना 490 ईसा पूर्व मगध के राजा ने की थी।
  • प्राचीन समय में पटना को पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था।
  • यह एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है जो आज तक सम्‍पन्‍नता से आबाद है।
  • इस शहर के बारे में मेगास्‍थनीज ने अपनी किताब, इंडिका में लिखा था।
  • सिक्‍खों के 10वें व अंतिम गुरू, गुरूगोविंद सिंह का जन्‍म यहां हुआ था।
  • पटना में तख्‍त श्री हरमंदिर बना हुआ है जो एक पवित्र धर्मस्‍थल है।
  • हरयंका, नंदा, मौर्य, शुंगा, गुप्त, पाला साम्राज्यों का अभ‍िन्न भाग रहा है यह शहर।
  • मौर्य काल में पटना की जनसंख्या करीब 4 लाख थी।
  • चीनी दार्शनिक फा हियान ने इस शहर को ‘पा-लिन-फोऊ’ नाम दिया था।
  • माना जाता है कि पुटराका राजा ने इस शहर को अपनी पत्नी पटाली के लिये जादू से तब बनाया था, जब रानी ने पुत्र को जन्म दिया था।
  • इसी से इसका नाम पटाली + पुत्र = पाटलीपुत्र पड़ा।
  • मना जाता है कि ‘पाटली’ एक पेड़ की प्रजाति है, जो सिर्फ पटना में पायी जाती है। उसी पर इसका नाम पड़ा।

पटना का नामकरण

कहा जाता है कि पहले इसे पाटलिपुत्र ही कहा जाता था, फिर शेरशाहसूरी ने पटना पर शासन किया और यहां की देवी पाटनी के नाम पर इसका नाम पटना रख दिया।

ज्ञान का भंडार

कालीदास, चाणक्‍य, आर्यभट्ट, पणिनि और वत्‍स्‍यानन की जन्‍मभूमि व कर्मभूमि भी पटना ही रही।

देश के सर्वाधिक आईएएस

देश की सर्वोच्‍च आईएएस परीक्षा को उत्‍तीर्ण करने वाले लोगों में से भारी संख्‍या सिर्फ बिहार पटना से होती है। देश के कई आईएसस सिर्फ पटना के होते हैं।

आजादी में योगदान

भारत की आजादी में पटना का विशेष योगदान रहा, नील की खेती के लिए चम्‍पारण आन्‍दोलन और भारत छोड़ों आन्‍दोलन की शुरूआत पटना से ही हुई थी।

दुनिया का सबसे लम्‍बा सड़क पुल

दुनिया का सबसे लम्‍बा सड़क पुल पटना में स्थित है जो कि 5575 मीटर लम्‍बा है, इसे महात्‍मा गांधी सेतू के नाम से जाना जाता है।

कम होती हैं भ्रूण हत्‍या

आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि पटना में देश के कई आधुनिक क्षेत्रों के मुकाबले कहीं कम लगभग न के बराबर भ्रूण हत्‍या होती है।

विदेशों तक पहुंचा लिट्टी-चोखा का स्‍वाद

पटना, बिहार के कुछ स्‍ट्रीट फूड स्‍टॉल के लिट्टी-चाेखा का स्‍वाद, विदेशों तक फैल गया है। विदेशी पर्यटकों को ये काफी भाता है।

देश का एकमात्र राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौकायन संस्थान

भारत का एकमात्र राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौकायन संस्थान, पटना शहर के गायघाट में स्थित है।

चार नदियों वाला शहर

पटना से चार नदियां गुजरती हैं- गंगा, सोन, गंडक और पुनपुन नदी।

डा. राजेन्‍द्र प्रसाद की कर्मभूमि

पटना में स्थित सदाक़त आश्रम, हमारे देशरत्‍न डा. राजेन्‍द्र प्रसाद की कर्मभूमि है। अब इसे एक पर्यटन स्‍थल बना दिया गया है।

शनिवार को खिचड़ी भोज

पटना के स्‍थानीय घरों में अक्‍सर शनिवार के दिन हमेशा खिचड़ी बनाई जाती है। जिसके साथ अचार, पापड़, दही और घी भी खाया जाता है।

कोलकाता के बाद सबसे बड़ा शहर

पूर्वी भारत की बात करें तो कोलकाता के बाद पटना दूसरा सबसे बड़ा शहर है।

पटना का इतिहास

पटना का इतिहास और परंपरा सभ्यता की शुरुआत से ही आरम्भ होती है . पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र या पाटलीपट्टन था जो 600 ईसा पूर्व इतिहास में पाया गया . पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है . चंद्रगुप्त मौर्य ने 4वी. ईसा में यहाँ अपनी राजधानी बनाई .

इसके बाद इस नगर का महत्त्व कम होता गया और 16वी ईसा में इसे फिर पहचान मिली जब शेरशाह सूरी का शासन आया . एक अन्य मान्यता के अनुसार पट्टन नाम के एक ग्राम से आज का पटना का जन्म हुआ . कहा जाता है कि आजादशत्रु ने पाटलिपुत्र बनाई . प्राचीन ग्राम पाटली के साथ पट्टन जुड़ कर पाटलिपुत्र बना . ग्रीक इतिहास में पाटलीबोथरा शब्द आता है जो शायद पाटलिपुत्र ही था .

आजादशत्रु ने इस नगर के लिय कई सुरक्षा इन्तेजाम कराया ताकि लिक्छवियों के लगातार आक्रमण से इसे बचाया जा सके . उसने पाया की यह नगर तीन दिशाओ से नदियों से घिरा था जो इसे नदियों के किला की सुरक्षा प्रदान करती थी . आजादशत्रु का पुत्र अपनी राजधानी राजगृह से पटना ले आया और यह स्थिति मौर्य और गुप्त काल में भी यथावत रही .

सम्राट अशोक ने यहीं से अपना शासन किया . चंद्रगुप्त मौर्य और समुद्रगुप्त जैसे पराक्रमी शासको की यह राजधानी रही . यहीं से चन्द्रगुप्त ने अपने सेना पश्चिमी सीमा पर ग्रीको से लोहा लेने भेजा था और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने शक और हूणों को वापस धकेला था .चन्द्रगुप्त काल में यही पर ग्रीक दूत मेगास्थनीज आ कर रहा था .

प्रसिद्ध यात्री फाहियान 3वी. ईसा में और व्हेनसान 7वी. ईसा यहाँ की यात्रा कि और उस काल कि रहन सहन और शासन पद्धति पर विस्तार से लिखा . कौटिल्य जैसे विद्वान यहाँ रहे और अर्थशास्त्र जैसी रचना लिखी . यह नगर प्राचीन काल से ही ज्ञान और विद्वत्ता के स्रोत्र के रूप में प्रसिद्धी पाई .

औरंगजेब का पोता शहजादा अजिमुशान को 1703 ई. में पटना का गवर्नर बनाया गया . इसके पहले शेरशाह ने अपनी राजधानी बिहारशरीफ से पटना बनाया . शहजादा अजिमुशान ने पटना को आधुनिक और सुन्दर शहर का रूप देने का प्रयास किया और इसका नाम अजीमाबाद रखा . जनसाधारण में यह पटना नाम से ही प्रचलित रहा और पुराने पटना के दोनों ओर की दीवारों के भग्नावषेश आज भी पटना साहिब के पास देखे जा सकते हैं .

उम्मीद करता हु आपको पटना पर निबंध (Essay on Patna in Hindi) के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी. अगर आपको हमारे द्वारा लिखा गया पोस्ट पसंद आता है तो आप अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। अगर आप कुछ पूछना या जानना चाहते है, तो आप हमारे फेसबुक पेज पर जाकर अपना सन्देश भेज सकते है. हम आपके प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे। इस पोस्ट को पढने के लिए आपका धन्यवाद!