सिक्किम पर निबंध – Essay on Sikkim in Hindi

नमस्कार दोस्तों ! आज इस पोस्ट के माध्यम से सिक्किम पर निबंध (Essay on Sikkim in Hindi) के साथ सिक्किम के बारे में पूरी जानकारी देने वाला हु। ‘सिक्किम’ शब्द का सर्वमान्य स्रोत लिम्बू भाषा के शब्दों सु (अर्थात “नवीन”) तथा ख्यिम (अर्थात “महल” अथवा “घर” – जो कि प्रदेश के पहले राजा फुन्त्सोक नामग्याल के द्वारा बनाये गये महल का संकेतक है) को जोड़कर बना है। तिब्बती भाषा में सिक्किम को “चावल की घाटी” कहा जाता है।

भारत ने 1947 में स्वाधीनता प्राप्त की। इसके बाद पूरे देश में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में अलग-अलग रियासतों का भारत में विलय किया गया। इसी क्रम में 6 अप्रैल, 1975 की सुबह सिक्किम के चोग्याल को अपने राजमहल के द्वार के बाहर भारतीय सैनिकों के ट्रकों की आवाज़ सुनाई दी।भारतीय सेना ने राजमहल को चारों दिशा से घेर रखा था। सेना ने राजमहल पर उपस्थित २४३ सैनिकों पर तुरंत नियंत्रण प्राप्त किया और सिक्किम की स्वतंत्रता की समाप्ति हो गयी। इसके बाद चोग्याल को उनके महल में ही नज़रबंद कर दिया गया।

सिक्किम पर निबंध (Essay on Sikkim in Hindi)

सिक्किम के पश्चिम में हिमालय की चोटियाँ सिक्किम राज्य एक पूरा पर्वतीय क्षेत्र है। पूर्वोत्तर भाग में स्थित सिक्किम दक्षिण में पश्चिम बंगाल से घिरा है और इसके दक्षिण पूर्व में भूटान के साथ, पश्चिम में नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी हिस्से पर अपनी सीमा साझा करता है।

विभिन्न जगहों की ऊँचाई समुद्री तल से 280 मीटर (920 फीट) से 8,585 मीटर (28,000 फीट) तक की है।अगर यहाँ की सबसे ऊँची चोटी की बात करे तो वह कंचनजंगा चोटी है।

सिक्किम का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी होने की वजह से खेती के लिए उपयोगी नहीं है इसके बाद भी कुछ ढलान वाले छेत्रो को खेती में बदल दिया गया है और सिकिकम में पहाड़ी तरीके से खेती होती है। सिक्किम का कुल क्षेत्रफल करीब 7000 वर्ग किलोमीटर के लगभग है सिक्किम की कुल आबादी 6 लाख है।

सिक्किम के ज्यादातर क्षेत्रों में पहाड़ी, ग्रीष्मकाल सुखदायक हैं क्योंकि यहाँ का तापमान 28 डिग्री से ज्यादा नहीं है, राज्य का एक तिहाई हिस्सा घने जंगलो से घिरा हुआ है।

राज्य में पर्यटन

essay on sikkim in hindi: सिक्‍किम अपने हरे-भरे पौधों, जंगलों, दर्शनीय घाटियों और पर्वतमालाओं और अव्‍वल सांस्‍कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है और यहां के लोग शांतिप्रिय के कारणयह राज्य पर्यटकों के लिए स्‍वर्ग है। राज्‍य सरकार पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और वे सभी सुख सुविधाएं दे रही है |

ताकि यहां आने वाले पर्यटक सिक्‍किम की जीवन-शैली और धरोहर को समझ सकें। पर्यटन उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए राज्‍य सरकार दक्षिण सिक्‍किम में चैमचेय गांव में हिमालयन सेंटर फॉर एडवेंचर दूरिज्‍म की स्‍थापना की है।

सिक्किम का प्रमुख माना जाने वाला बौद्ध मठ पेलिंग में स्‍थित पेमायांत्‍से है। इसके अतिरिक्त पश्‍चिमी सिक्किम का ताशिदिंग मठ है,जो सिक्‍किम के सभी मठों में सबसे पवित्र माना जाता है। इस राज्य का सबसे प्राचीन मठ युकसोम है। यह लहातसुन चेन्‍पों का व्‍यक्‍तिगत आश्रम था जो संभवत: 1700 ईसवी में स्थापित किया गया था।

कुछ अन्‍य प्रसीद मठों में – फोडोंग, फेन्‍सांग, रुमटेक, नगाडक, तोलुंग, आहल्‍य, त्‍सुकलाखांग, रालोंग, लाचेन, एन्‍चेय। यहाँ का प्रमुख हिंदू मंदिर – गंगटोक के मध्‍य में स्‍थित जिसको ठाकुर बाड़ी के नाम से जानते है | इसके बाद पर्यटकों के लिए दक्षिण जिले की एक पवित्र गुफा भी है जिसमें एक जगमगाता भी शिवलिंग मौजूद है| राज्‍य में पर्यटकों के लिए कुछ गुरुद्वारे और मस्‍जिदें भी मौजूद हैं।

सिक्किम के उत्सव

सिक्किम के लोगों के लिए हिंदू धर्म एवं बौद्ध धर्म प्रमुख है। तिब्बती और सिक्किम के लोग, एवं भूटान से आये लोग यहाँ बौद्ध धर्म का पालन करते हैं। सिक्किम में लगभग सभी धर्मो के लोगो के फेस्टिवल बड़े उत्साह से मनाये जाते है | हिंदू त्यौहारो के साथ-साथ नेपाली त्यौहारों भी मनाये जाते है।

सिक्किम के प्रमुख त्यौहार में द्रुकप्रेसी, पांग लुबसोल, ल्हाबाब ,ड्युचेन, ड्रुपका, सागा दावा, लॉसोंग और दासैन को बौद्ध धर्म में मनाया जाता है |सिक्किम के महत्वपूर्ण त्योहारों में माघे संक्रांति,चैत्र दसाई/राम नवमी, दसई त्योहार, सोनम लोसूंग, नामसूंग, तेन्दोग हलो रूम फाट (तेन्दोंग पर्वत की पूजा), लोसर उत्सव,होली,राम नवमी,दुर्गा पूजा,दशहरा,दिवाली,क्रिसमस डे और नववर्ष प्रमुख है | इतना छोटा प्रदेश होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में त्यौहार मनाये जाते है यह इस राज्य की विविधता को दर्शाता है |

सिक्किम की संस्कृति

सिक्किम में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है जो हिंदू धर्म की परम्परा और बौद्ध धर्म के लेपचास के साथ मिश्रित होने से बनती है | क्युकी सिक्किम में बौद्ध धर्म का पालन किया जाता हैं, उनके त्योहार सरल, कम भरे हुए और अधिक रंगीन होते हैं सिक्किम (essay on sikkim in hindi) के ज्यादातर स्थानों में बौद्ध उत्सव जैसे द्रुकप्रेसी, पांग लुबसोल, सागा दावा, लॉसोंग और दासैन को बड़े व्यापक रूप से मनाया जाता है।

मठ के आंगनों में लामा द्वारा सिक्किम का मास्क नृत्य, पूर्वोत्तर भारत में सबसे रंगीन नृत्यों में से एक माना जाता है,जिससे यहाँ की रंगीन संस्कृति का सच्चा सार दिखाई देता है।

पाश्चात्य रॉक संगीत यहाँ घरो एवं भोजनालयों में, गैर-शहरी इलाक़ों में देखी जा सकती है। हालाँकि हिन्दी संगीत ने भी लोगों में अपनी एक जगह बनाई है।नेपाली रॉक संगीत, तथा पाश्चात्य संगीत पर नेपाली काव्य भी लोगो में काफ़ी लोकप्रिय है। फुटबॉल एवं क्रिकेट सिक्किम के प्रमुख खेल हैं।

अगर बात हम यहाँ के व्यंजन की करे जैसे थुक्पा, चाउमीन, थान्तुक, फाख्तु, ग्याथुक और वॉनटन यह कभी लोकप्रिय हैं।इसके अलावा भाप से पके और सब्जियों से भरे पकौडि़याँ, सूप के साथ परोसा हुआ भैंस या सूअर का माँस लोकप्रिय लघु आहार है इसके अलावा राज्य में बीयर, विस्की, रम और ब्रांडी का सेवन भी काफी किया जाता है।

सिक्किम के ग्रामीण इलाको में घर हैं जो मुख्य रूप कड़े बाँस के ढाँचे पर लचीले बाँस का आवरण डाल कर बनाये होते हैं। इन घरो में ऊष्मा का संरक्षण करने के लिए इस पर गाय के गोबर का लेप लगाया जाता है। सिक्किम के अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ज्यादातर लकड़ी के घर बनाये जाते हैं।

सिक्किम के भाषा

वर्तमान में सिक्किम में कुल छह भाषाए एक दूसरे से बात करने के लिए बोली जाती है| नेपाली राज्य की प्रमुख भाषा है, क्युकी नेपाली जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा हैं और यह भाषा इंडो-आर्य परिवार से निकली है दूसरी लोकप्रिय भाषा भूटिया है, जो तिब्बती-बर्मन परिवार से निकली है। अन्य भाषाओं में लेपचा, शेरपा और लिम्बु इन सभी भाषाओं को व स्कूलों में पढ़ाया जाता है |

गरम पानी के झरने

सिक्किम अपने गर्म पानी के झरनो के लिए भी जाना जाता है यहाँ पर गरम पानी के अनेक झरने मौजूद हैं जो अपनी रोगहर क्षमता के लिये प्रसीद हैं। सबसे महत्वपूर्ण गरम पानी के झरने में फुरचाचु, युमथांग, बोराँग, रालांग, तरमचु और युमी सामडोंग प्रमुख हैं।

इन झरनों में बड़ी मात्रा में सल्फर पाया जाता है और ये नदी के किनारे पर स्थित हैं। इन गरम पानी के झरनों का औसत तापमान 50 °C होता है। सिक्किम में लेप्चा, भूटिया और नेपाल के तीनों समुदाय अलग-अलग वेशभूषा पायी जाती है ।

सिक्किम की पुरुष वेशभूषा

इस राज्य में लेप्चा पुरुषों की पारम्परिक वेशभूषा थोकोरो-दम होती है जिसमें एक सफेद पाजामा येन्हत्से, एक लेपचा शर्ट और शंबो, टोपी आदि शामिल होते है। पुरुषो की पोशाक की बनावट खुरदरी और लंबे समय तक चलने योग्य होती है । जबकि भूटिया पुरुषो की पारंपरिक वेशभूषा में खो शामिल होता है, जिसको बाखू भी कहते है।

सिक्किम के एक अन्य समूह नेपाली पुरुष में चूड़ीदार पायजामा, एक शर्ट, जो कि दउरा शामिल होता है, जो शूरवल के ऊपर खुद को पहनते हैं। यह आसकोट, कलाई कोट और उनकी बेल्ट से जुड़ा होता है जिसको पटुकी भी कहा जाता है।

सिक्किम की महिला पोशाक

लेप्चा महिलाओं की पोशाक डमवम या डुमिडम है। लेप्चा महिलाओं द्वारा गहने , प्रवेश, बालियां, नामचोक, लयक एक हार, ग्यार, एक कंगन आदि पहना जाता है । भूटिया महिला की सामान्य वेशभूषा में खो या बाखू, हंजु, एक रेशमी फुल-स्लीव्स वाला ब्लाउज, कुशेन, एक जैकेट, टोपी का एक अलग पैटर्न, शंबो और शबचू आदि पहना जाता हैं।

जबकि विवाहित भूटिया महिलाओं में पैंगडन, धारीदार एप्रन, विवाहित भूटिया महिलाओं का पहनावा होता है। भूटिया महिलाओं के आभूषण येनचो, बाली, खाओ, हार, फीरु, मोती आभूषण, दीव, सोने की चूड़ी, और जोको, अंगूठी आदि हैं। भूटिया लोग ज्यादातर सोने के आभूसणो को प्राथमिकता देते है ।

अगर बात नेपाली महिलाओं की करे तो पचौरी, कपड़े का एक रंगीन टुकड़ा, सिर से कमर तक निलंबित, नृत्य प्रदर्शन के दौरान अलंकरण उपयोग होता है।

अन्य मारवाड़ी, बिहारी, बंगाली या पंजाबी समुदाय सलवार-कमीज दुपट्टा, साड़ी, ऊनी वस्त्र, और पश्चिमी पोशाक, जैसे जींस, टी-शर्ट, पतलून आदि वेशभूसा होती है ।

सिक्किम के इतिहास

सिक्किम का सबसे प्राचीन इतिहास 8 वी सदी में मिलता है जब बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे ने सिक्किम का दौरा किया था। ऐसा लिखित प्रमाण मिलता है कि उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार किया। सिक्‍किम का आधुनिक इतिहास 13 वीं शताब्‍दी से प्रारम्भ होता है जब लेप्‍चा प्रमुख थेकोंग-थेक और तिब्‍बत के राजकुमार खे-भूमसा के बीच भाईचारे का एक समझौता उत्तरी सिक्‍किम के काब लुंगत्सोक में हुआ|

इसके बाद सन 1641 में तिब्‍बत के लामा संतों ने पश्‍चिमी सिक्‍किम essay on sikkim in hindi के युकसाम प्रांत की यात्रा की, जहाँ पर उन्‍होंने खे-हूमसा के छठी पीढ़ी के वंशज फुंत्‍सोग नामग्‍याल राजवंश का जनम हुआ।उसके बाद तीन जनजातियां, सोम, नाओंग और चांग, राज्य में इस्तेमाल होने से पहले लेपचा ने 17 वीं शताब्दी में सिक्किम पर आक्रमण किया।

उस समय में सिक्किम में राजशाही शासन अस्तित्व में था और सबसे प्रमुख राज्य चोगियों के पास था जो की राज्य के निर्विवाद शासक थे। जब ब्रिटिश हुकूमत देश में पहुंची तो सिक्किम के सम्राट ने नेपाली और भूटानी से लड़ने के लिए ब्रिटिश के साथ गठबंधन किया। 1947 में भारतीय के आजाद होने पर यह राज्य भारत के अंतर्गत आ गया|फिर सनं 1975 में सिक्किम भारतीय संघ का अभिन्‍न हिस्सा बन गया।

सिक्किम की जनसँख्या

जनसंख्या के मामले में सिक्किम छोटा प्रदेश है यहाँ की कुल जनसंख्या 6 लाख से ज्यादा नहीं है, इसमें से 50% पुरुष और 50% महिलाएं हैं। लेपचा इस स्थान के मूल निवासी थे। सिक्किम में ज्यादातर उद्योगपतियों जन्म से लेपचा हैं। भूटियां, यह लोग तिब्बत के खाम जिले से आए थे और यह सिक्किम का दूसरा बड़ा जातीय समूह हैं।

भूटियां लोग की वजह से बौद्ध धर्म सिक्किम में आया था जो कि महान कृषक और व्यापारियों थे। तीसरा जातीय समूह नेपाल द्वारा आया था जो सिक्किम में आबादी का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है।

राज्य के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में तिब्बतियों के कुछ परिवार देखने को मिलते हैं। इसके अलावा अन्य बंगाली, मारवाड़ी और बिहारी जाति के कुछ निवासि देखने को मिलते है । बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म इस राज्य के दो प्रमुख धर्म है | पहले लोग लिपचा मूल के थे, लेकिन औपनिवेशिक ब्रिटिशों के आगमन पर कुछ लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए इसलिए सिक्किम में एक छोटा समुदाय ईसाई भी देखने को मिलते है |

सिक्किम में अल्पसंख्यक मुसलमान भी हैं लकिन सबसे खूबसूरत बात यह है कि विभिन्न धर्मों होने के बाद भी अभी तक कोई साम्प्रदायिक दंगों या विरोध नहीं देखा गया है और यह सिक्किम कि एकता को दर्शाता है |

परिवहन

सिक्किम में कठिन भूक्षेत्र के कारण कोई हवाई अड्डा नहीं था पर अभी एक हवाई अड्डा बन गया है। अथवा रेल स्टेशन नहीं है। समीपतम दूसरा हवाईअड्डा। बागडोगरा हवाई अड्डा है। यह हवाईअड्डा गंगटोक से १२४ कि०मी० दूर है।

गंगटोक से बागदोगरा के लिये सिक्किम हेलीकॉप्टर सर्विस द्वारा एक हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है जिसकी उड़ान ३० मिनट लम्बी है, दिन में केवल एक बार चलती है और केवल ४ लोगों को ले जा सकती है। गंगटोक हैलीपैड राज्य का एकमात्र असैनिक हैलीपैड है। निकटतम रेल स्टेशन नई जलपाईगुड़ी में है जो सिलीगुड़ी से १६ किलोमीटर। कि०मी० दूर है।

राष्ट्रीय राजमार्ग ३१A सिलीगुड़ी को गंगटोक से जोड़ता है। यह एक सर्व-ऋतु मार्ग है तथा सिक्किम में रंग्पो पर प्रवेश करने के पश्चात तीस्ता नदी के समानान्तर चलता है। अनेक सार्वजनिक अथवा निजी वाहन हवाई-अड्डे, रेल-स्टेशन तथा सिलिगुड़ी को गंगटोक से जोड़ते हैं। मेल्ली से आने वाले राजमार्ग की एक शाखा पश्चिमी सिक्किम को जोड़ती है।

सिक्किम essay on sikkim in hindi के दक्षिणी और पश्चिमी शहर सिक्किम को उत्तरी पश्चिमी बंगाल के पर्वतीय शहर कलिम्पोंग और दार्जीलिंग से जोड़ते हैं। राज्य के भीतर चौपहिया वाहन लोकप्रिय हैं क्योंकि यह राज्य की चट्टानी चढ़ाइयों को आसानी से पार करने में सक्षम होते हैं। छोटी बसें राज्य के छोटे शहरों को राज्य और जिला मुख्यालयों से जोड़ती हैं।

शिक्षा

साक्षरता प्रतिशत दर ६९.६८% है, जो कि पुरुषों में ७६.७३% तथा महिलाओं में ६१.४६% है। सरकारी विद्यालयों की संख्या १५४५ है तथा १८ निजी विद्यालय भी हैं जो कि मुख्यतः नगरों में हैं। उच्च शिक्षा के लिये सिक्किम में लगभग १२ महाविद्यालय तथा अन्य विद्यालय हैं। सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय आभियान्त्रिकी, चिकित्सा तथा प्रबन्ध के क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्रदान करता है।

सिक्किम कैसे जाये

हवाईजहाज के द्वारा

सिक्किम में हवाई अड्डा नहीं है। सबसे नजदीक हवाई अड्डा बागडोगरा हवाई अड्डा (आईएक्सबी) पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी के पास में स्थित है| यह सिक्किम की राजधानी गंगटोक से लगभग 125 किमी दूर स्थित है। बागडोगरा दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों से जुड़ा है।

सड़क मार्ग के द्वारा

न्यू जलपाईगुड़ी जो सड़क से गंगटोक से तीन घंटे दूर स्थित है । दार्जिलिंग, कालीम्पोंग और सिलीगुड़ी सीधे राज्य के गंगटोक और अन्य शहरों से भलीभांति जुड़े हुए हैं। लेकिन मानसून के दौरान, भूस्खलन और हिमस्खलन सड़क मार्ग कुछ समय के लिए बंद हो जाते है |

रेल मार्ग के द्वारा

सिक्किम अभी तक रेल मार्ग से नहीं जुड़ा है सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन कोलकाता और दिल्ली सहित भारत के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा है।

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