सूरज पर निबंध – Essay on Sun in Hindi

इस पोस्ट में सूरज पर निबंध (Essay on Sun in Hindi) कैसे लिखा जाता है और सूरज के बारे में बहोत अच्छे से जानने की कोशिस करेंगे।सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है और उसका व्यास लगभग १३ लाख ९० हज़ार किलोमीटर है जो पृथ्वी से लगभग १०९ गुना अधिक है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग १४,९६,००,००० किलोमीटर या ९,२९,६०,००० मील है तथा सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश को आने में ८.३ मिनट का समय लगता है।

सूरज पर निबंध – Essay on Sun in Hindi

सूरज हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह हमें भरपूर मात्रा में रौशनी व गर्मी देता है जिससे हम जीवन निर्वाह कर सकते हैं। इसके गुणों के कारण ही हिन्दु धर्म के साथ-साथ कई धर्मों एवं सभ्यताओं में इसे ज्ञान एवं शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है।
जिस प्रकार धरती व अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार सूरज भी आकाश गंगा के केन्द्र की परिक्रमा करता है। सूरज सौर मण्डल का प्रधान है।

इसकी उपस्थिति के बगैर धरती बिलकुल ठण्डी व जीव-जन्तु तथा पेड़-पौधों रहित होती। सूरज के उगने के साथ ही धरती पर जीव-जन्तुओं की दिनचर्या की भी शुरुआत हो जाती है और सब अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं।

सूरज के निकलते ही चिड़ियों की चहचहाट, फूलों का खिलना, मनुष्य का भी अपने-अपने कार्यों में संलग्न हो जाना सब प्रारम्भ हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति सूरज की आवश्यक मात्रा में गर्मी नहीं ले पाता तो कई प्रकार की बीमारियाँ उसे अपना शिकार बना लेती हैं। सूरज के कारण घर की सीलन व कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े घर से दूर रहते हैं। जिससे घर में बीमारियों का प्रकोप नहीं होता।

Short Essay on Sun in Hindi Language

सूरज पूरे सौर मण्डल के केन्द्र में स्थित एक तारा है। वैसे तो कई अन्य तारों का अपना प्रकाश भी होता है लेकिन सौरमण्डल के कुछ तारे ऐसे हैं जो सूरज के प्रकाश से चमकते हैं। यह आकाश गंगा के 100 अरब से अधिक तारों में से एक तारा ही है। सूरज एक आग का गोला है। जो बिलकुल भी ठोस नहीं है। यह पूर्ण रूप से गैसों का बना हुआ है।

सूरज की उम्र लगभग 9 बिलियन वर्ष मानी गई है। सूरज धरती से तो फुटबॉल जैसा दिखता है। लेकिन इसका व्यास 13 लाख 92 हजार किलोमीटर है। सूरज धरती से लगभग 110 गुणा ज्यादा बड़ा है। पृथ्वी से 150 मिलीयन किलोमीटर दूरी पर स्थित होने के बावजूद भी यह हमें इतनी रौशनी व ताप प्रदान करता है। सूरज का प्रकाश सूरज से धरती पर आने के लिए 8 मिनट 17 सैकेण्ड लेता है।

यदि सूरज का प्रकाश एक दिन भी धरती को न मिले तो यह धरती कुछ ही घण्टों में उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव का रूप ले लेगी। सूरज 74 प्रतिशत हाईड्रोजन और 24 प्रतिशत हीलियम से बना है। बाकी के 2 प्रतिशत ऑक्सीजन, नीयोन, हीलियम तथा लोहे से बने हैं। सूरज का बाहरी सतह का तापमन 5500 डिग्री सेलसीयस है जबकि अंदरूनी भाग का तापमान 1 करोड़ 31 लाख डिग्री सेलसीयस है।

संसार में प्राकृतिक प्रकाश का कारण सूरज ही है। यदि सूरज न होता तो चारों ओर हर समय अंधकार ही छाया रहता। दिन और रात भी न होते। चाँद की चाँदनी भी सूरज के कारण ही है। यदि सूरज न हो तो इन सबकी कल्पना करना असम्भव है। सौरमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह जुपीटर भी सूरज के आगे बहुत छोटा मालूम होता है। सौर मण्डल के सभी ग्रह सूरज की परिक्रमा करते हैं।

मनुष्य तथा अन्य जीव-जन्तुओं का जीवन पेड़ों के बिना असम्भव है और पेड़ों का सूरज के बिना। अतः धरती पर जीवन का मुख्य आधार सूरज ही है। पेड़-पौधे सूरज की ऊर्जा का उपयोग अपना खाना बनाने में करते हैं।

पेड़ों द्वारा ही मनुष्य को ऑक्सीजन प्राप्त होती है। जिस कारण हम साँस ले पाते हैं। सूरज की गर्मी से समुद्र, सरोवर, झील आदि का पानी वाष्प बनकर वायुमण्डल में बादल के रूप में जमा होता है और यह बादल हमें वर्षा प्रदान करते हैं। यदि सूरज ही न हो तो यह चक्र ही न चले और पानी के बिना यह धरती निर्जर ग्रह बनकर रह जाये।

आजकल प्रकृति द्वारा प्रदान की गई इस गर्मी का उपयोग सौर ऊर्जा बनाने के रूप् में भी किया जाता है। कई स्थान जहाँ पर सूरज की अच्छी धूप रहती है वहाँ पर सौर ऊर्जा का प्रयोग बिजली लाई जाती है।

पानी गर्म करने के लिए गीज़र, खाने बनाने के लिए सोलर कुकर आदि का प्रयोग कर सूरज की गर्मी का उपयोग किया जा रहा है। जमीनी वाहनों से लेकर छोटे विमान तक अब सौर ऊर्जा से चलाये जा रहे हैं। यदि इसी प्रकार सौर ऊर्जा का प्रयोग किया गया तो प्रकृति का पर्यावरण संतुलन भी संतुलित हो सकता है।

Long Essay on Sun in Hindi Language

सूरज सौरमंडल का वह तारा है जिसके चारों तरफ पृथ्वी और सभी ग्रह घुमते है। सूरज बहुत सी गैसों से मिलकर बना है। इसका 74 प्रतिशत भाग हाईड्रोजन है और 24 प्रतिशत हीलीयम से बना है और 2 प्रतिशत ऑक्सीजीन और ओजोन आदि से बना है।

सूरज धरती से देखने में बहुत ही छोटा दिखाई देता है क्योंकि इसकी दूरी पृथ्वी से बहुत ही ज्यादा है। सूर्य का व्यास धरती से 110 गुना ज्यादा है। सूरज का प्रकाश धरती तक पहुँचने में 8 मिनट 17 सैकेंड लगते है। इसकी किरणे 3 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती पर पहुँचती है।

सूरज संसार को रोशनी और गर्मी प्रदान करता है। अगर सूरज न हो तो पूरा संसार अंधकार में डूब जाएगा और जीवन असंभव हो जाएगा। लोगो को सबसे ज्यादा सूरज की जरूरत सर्दीयों में महसुस होती है। सूरज की किरणों में कुछ हानिकारक किरणे भी होती है जो कि शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक है।

सूरज का उदय पूर्व दिशा में होता है और अस्त पश्चिम दिशा में होता है। सूरज उदय और अस्त के सम़ लाल रंग का प्रतीत होता है। सूरज कि किरणे जब हवा में मौजुद बारिश की किरणों पर पड़ती है तो इंद्रधनुष बनता है।

सूरज पर निबंध (Long and Short Essay on Sun in Hindi)

सूरज सौरमंडल का सबसे बड़ा चमकने वाला सितारा है। यह पृथ्वी की तरह ठोस नहीं है बल्कि गैसों से बना हुआ है। सूरज सुर्य मंडल का सबसे ज्यादा वजन रखता है लगभग 99 प्रतिशत। सूरज का 72 प्रतिशत भाग हाईड्रोजन से बना है और 26 प्रतिशत हिलीयम और 2 प्रतिशत कार्बन, ऑक्सीजन आदि से मिलकर बना है। सूरज का व्यास पृथ्वी से 110 गुणा बढ़ा होता है।

सूरज का गुरत्वाकर्षण बहुत ज्यादा होता है जिसके कारण सभी अन्य ग्रह अपने निर्धारित कक्ष में ही घुमते है। सभी ग्रह और पृथ्वी, सूरज के चारों तरफ ही घुमते है।

सूरज के संस्कृत में 108 नाम है। सूर्य हमें रोशनी और गर्मी प्रदान करता है। सूरज का प्रकाश धरती तक पहुँचने में 8 मिनट 17 सैकेंड लगते है। सूरज की किरणें 3 लाख किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से धरती पर पहुँचती है। धरती 24 घंटे में अपने धुरे के समक्ष एक चक्कर पूरा करती है जबकि सूरज को 25 दिन लगते है एक चक्र पूरा करने में। सूरज की किरणों में कुछ हानिकारक किरणें भी होती है जो कि शरीर के लिए बहुत हानिकारक होती है।

सूरज का असली रंग सफेद होता है जबकि वातावरण के कारण यह पीला दिखाई पड़ता है। सूरज का आकार इतना बड़ा होता है कि उसके अंदर बहुत सी पृथ्वी समा सकती है। साल के 360 दिनों में हर जगह पर एक बार सूर्य ग्रहण पक्का नजर आता है। यह ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट का होता है।

अगर सूरज का पेंसिल जितना टुकड़ा भी धरती पर आ जाए तो इंसान 145 किलोमीटर की दुरी से ही जलकर मर सकता है। सूरज के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। अगर एक दिन भी सूरज न निकले तो पूरी धरती कुछ ही घंटों में बर्फ में परिवर्तित हो जाएगी।

सूरज में नाभिकीय विखंडन जैसी रिएक्शन भी होकी है। अगर सूरज की एक घंटे की पूरी ऊर्जा सोलर पैनल में इकट्ठी कर ली जाए तो साल की बिजली की खप्त बच सकती है। सूरज सभी के लिए बहुत ही जरूरी है क्योंकि इसके बिना पेड़ पौधे भी नहीं रह सकते वह भोजन भी नहीं बना सकते। सूरज का उदय पूर्व दिशा में होता है और यह सूबह के समय लाल रंग का दिखाई देता है। सूरज अब तक सिर्फ 20 बार ही आकाश गंगा का चक्कर लगा पाया है जिसके एक चक्कर में 25 करोड़ साल लग जाते है। सूरज धरती पर जीवन के लिए जरूरी है।

जीवन चक्र

सूर्य आज सबसे अधिक स्थिर अवस्था में अपने जीवन के करीबन आधे रास्ते पर है। इसमें कई अरब वर्षों से नाटकीय रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ है,  और आगामी कई वर्षों तक यूँ ही अपरिवर्तित बना रहेगा। हालांकि, एक स्थिर हाइड्रोजन-दहन काल के पहले का और बाद का तारा बिलकुल अलग होता है।

उम्मीद करता हु आपको सूरज पर निबंध (Essay on Sun in Hindi) को पढ़ के अच्छा लगा होगा और इसके बारे में आपको विशेष जानकारी मिली होगी। अगर आप कुछ पूछना या जानना चाहते है, तो आप हमारे फेसबुक पेज पर जाकर अपना सन्देश भेज सकते है। हम आपके प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे। इस पोस्ट को पढने के लिए आपका धन्यवाद!