कुतुब मीनार पर निबंध – Essay On Qutub Minar In Hindi

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कुतुब मीनार पर निबंध – Short Essay On Qutub Minar In Hindi

भारत में कई ऐतिहासिक स्मारक है जो भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते है और उनमें से एक है क़ुतुब मीनार। इसका निर्माण गुलाम वंश के शासक क़ुतुबुद्दीन ऐबक के द्वार किया गया।मुग़ल वंश सदैव ही ऐसी स्मारकों के निर्माण के लिए जाना जाता है। इस वंश में कई ऐसे शासक हुए जिन्हें स्मारकों और इमारतों से बहुत लगाव था।क़ुतुब मीनार का निर्माण बाहरवी शताब्दी में हुआ था ।

यह भारत की राजधानी दिल्ली के दक्षिण में महरौली भाग में स्तिथ है।क़ुतुब मीनार का निर्माण क़ुतुबुद्दीन ऐबक के शाशनकाल में पूर्ण नही हो पाया था तब बाद में इसी वंश के उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसे पूरा किया। इसकी गिनती भारत की दूसरी सबसे बड़ी इमारतों में कई जाती है। कुतुब मीनार का अर्थ है न्याय का स्तम्भ, यह तिहत्तर मीटर लंबा है और मिग़ल वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति का सबसे बड़ा उदहारण है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से हुआ है। यह यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में सूचीबद्ध है।

इसके अंदर तीन सौ उनहत्तर सीढ़ियाँ है और पाँच मंज़िल है।इसकी ऊपरी मंजिल से पूरे शहर का एक बहुत सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। यह इस्लामिक सेना की सैन्य शक्ति का प्रतीक है। यह भारत की धरोहर एवं शान है जो विश्व स्तर पर भारत को गरिमा प्रदान करता है।यह एक संकवाकर इंडो-इस्लामिक शैली में बनाई गई मीनार है। क़ुतुब मीनार के चारों ओर हरियाली है,

पेड़-पौधे,बगीचे,पशु,पक्षियों के कलरव से यह पूर्णतः प्राप्त करता है। यह भारत के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है जिसे देखने के लिए पूरे विश्व के कोने-कोने से लोग आते है,यह एक आकर्षण का केंद्र है। क़ुतुब मीनार में कला को देखा जा सकता है। यह वह पहला स्मारक है जिसे किसी मुग़ल शासक ने अपने जीवित रहते बनवाया था।

हिंदुओं की यह मान्यता है कि इस इमारत का निर्माण वर मिहिर जो कि चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के नौ रत्नों में से एक थे उनके द्वार करवाया गया था और इसका नाम विष्णु ध्वजा था। प्राचीन समय में यह माना जाता था कि जो कोई भी क़ुतुब मीनार के पीछे खड़ा होकर उसे अपनी हाथों से घेर लेगा उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जायेंगी। यह सप्ताह में सुबह छ से शाम छ तक खुला रहता है। क़ुतुब मीनार दिल्ली-गुड़गांव के रास्ते में स्तिथ है और इसके आस-पास कई प्राचीन एवं मध्यकालीन संरचनायें और खंडहर भी है।
चट्टियों में स्कूलों द्वारा बच्चों को घुमाने एवं उनकी जानकारी बढ़ाने के लिए इसी स्थल को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। यह इमारत अब थोड़ा झुक सी गयी परंतु फिर भी अपना अस्तित्व बनाये हुए है। यह इस्लामिक जीत तथा शौर्य का प्रतीक है।

इस इमारत की कला और नक्काशी को देखकर उस समय की राजनीति,कलावस्तु,सभ्यता और संस्कृति का पता चलता है। क़ुतुब मीनार में प्रकाश आने के लिए 2सताइस झीरियाँ बनाई गयी है। अंदर से यह मीनार शिलालेखों से अलंकृत है। यह स्मारक पिछले आठ सौ वर्षों से भी ज्यादा प्राचीन है परंतु फिर पर्यटकों को अपनी ओर उतनी ही तीव्रता से खींचता है।

लाखों लोग दूर-दूर से  सिर्फ इसकी एक झलक पाने को आते है। क़ुतुब मीनार की दीवारों में लगे लाल पत्थरों पर कुरान की आयतें और मौहम्मद गोरी तथा क़ुतुबुद्दीन ऐबक की प्रसंशा की गई है। इस इमारत का  निर्माण  ११९३ई. में प्राम्भ हुआ था। इसके ऊपर और नीचे के मंज़िलों का निर्माण सं  में फ़िरोज़ शाह तुगलक ने किया था। इस मीनार को सबसे बड़ी गुम्बद वाला मीनार भी कहा जाता है। इसके आकर में 14.3 मीटर आधार व्यास है और 2.7 मीटर शीर्ष व्यास है। इस इमारत के पास में कई अन्य इमारतों का निर्माण हुआ है ऐसा माना जाता है कि इन इमारतों को अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया था क्योंकि वह क़ुतुब मीनार से ऊंचा मीनार बनवाना चाहता था परंतु खिलजी के मौत के बाद वह काम अधूरा रह गया।

संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि क़ुतुब मीनार भारत का सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक है यह भारत की शान और गौरव है।

 


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