सड़क सुरक्षा सप्ताह – Road Safety Week in Hindi

भारत में कई शहरों; जैसे- दिल्ली, बैंगलोर, मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, वड़ौदा, पुणे या पूना, भुवनेश्वर, हैदराबाद, चंड़ीगढ़ आदि में सड़क सुरक्षा सप्ताह बहुत उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाता है। सड़क सुरक्षा से संबंधित बहुत से कार्यक्रमों का आयोजन करने के द्वारा लोगों को सड़क पर कैसे वाहन चलाते हैं के बारे में प्रोत्साहित किया जाता है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह – Road Safety Week in Hindi

इस अभियान के पूरे सप्ताह के दौरान विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक बैनर, सुरक्षा पोस्टर, सुरक्षा फिल्म, जेब गाइड और सड़क सुरक्षा से संबंधित पत्रक आदि सड़क पर यात्रा करने वाले यात्रियों को दिए जाते हैं। सड़क पर यात्रा करते समय वे सड़क सुरक्षा के बारे में प्रोत्साहित होते हैं; अर्थात्- यात्रा करने का योजनापूर्ण, अच्छी तरह से आयोजित और पेशेवर तरीका। वे लोग जो गलत तरीके से सड़क पर वाहन चलाते हैं, उन्हें गुलाब का फूल देकर उनसे सड़क सुरक्षा मानकों और यातायात के नियमों का पालन करने का अनुरोध किया जाता है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह

32वां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह को “राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह” के रूप में 18 जनवरी (सोमवार) से लेकर 17 फरवरी (बुधवार) तक मनाया गया।

सड़क सुरक्षा सप्ताह विशेष

इस साल राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह को “राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह” के रूप में 18 जनवरी (सोमवार) से लेकर 17 फरवरी (बुधवार) तक मनाया गया। में पहली बार राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह को एक महीने तक मनाया गया।

सड़क सुरक्षा सप्ताह विशेष

वर्ष 2020 के सड़क सुरक्षा सप्ताह का थीम था “सड़क सुरक्षा – जीवन रक्षा”। जिसका सीधे मायनों में अर्थ सावधानी के साथ सड़क नियमों का पालन करना और अपने जीवन को सुरक्षित करना है।

महिंद्रा जो कि एक यातायात उत्पादन कंपनी है, ने सड़क सुरक्षा सप्ताह को ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर, पूरे देश के लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए एक पहल में भाग लिया। इस जागरूकता अभियान के तहत वे लोगों को आए दिन हो रहे सड़क दुर्घटना से बचाव एवं सड़क सुरक्षा नियमों से उन्हें पूरे सप्ताह प्रशिक्षित किया।

मुंबई पुलिस ने कुछ स्वयं सेवकों कि मदद से हेलमेट न पहनने वाले चालकों को गुलाब देकर ऐसा न करने कि दरख़्वास्त कि।
बिहार के राज्य के परिवहन मंत्री संजय कुमार निराला ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 को ग्रामीण इलाकों में भी सख्ती से लागू करने का आदेश दिया। ताकी ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके और सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।

जमशेदपुर में सड़क सुरक्षा सप्ताह का आगाज़ करते हुए लोगों में जानकारी फैलाने के लिए 14 जनवरी को बाईकों कि रैली निकाली और 17 जनवरी को रन फॉर सेफ्टी नामक कार्यक्रम का आयोजन किया। सड़क सुरक्षा सप्ताह कैसे मनाया जाता है सड़क सुरक्षा सप्ताह निम्नलिखित गतिविधियों के द्वारा मनाया जाता है:

गुलाब, चॉकलेट और फूलों सहित सड़क सुरक्षा पत्रक सड़क पर यात्रा करने वाले यात्रियों में बाँटे जाते हैं। सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को सड़क सुरक्षा के साधनों, तरीकों और आवश्यकताओं के बारे में व्याख्या की जाती है। उन्हें सड़क पर कहीं भी ड्राइविंग करते समय हेलमेट या सीट बेल्ट का प्रयोग करना चाहिए।

बहुत सी पेंटिंग और कला प्रतियोगिताएं, सड़क सुरक्षा घोषणाएं, प्रदर्शनियों, सड़क नियमों का परीक्षण, हेलमेट के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए लड़कियों की स्कूटर रैली, अखिल भारतीय रेडियो पर सड़क सुरक्षा पर वाद-विवाद, कार्यशालाएं, सेमिनार आदि गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

चालकों को सड़क सुरक्षा की ओर प्रोत्साहन देने के लिए मुफ्त चिकित्सा जाँच और ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाता है।

सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सड़क सुरक्षा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। ताश का खेल, पहेली, बोर्ड खेल सहित यातायात सुरक्षा खेल आदि का आयोजन स्कूल के बच्चों को शिक्षित करने के लिए किया जाता है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियान का आयोजन क्यों आवश्यक है भारतीय उपमहाद्वीप में लोगों को राष्ट्रीय सड़कों की सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए सड़क सुरक्षा अभियान का आयोजन आईएसएस भारत, एचएसई (स्वास्थ्य, सुरक्षा और वातावरण) द्वारा की गई पहल है। आईएसएस भारत ने देश में जनवरी के पहले हफ्ते में पूरे सप्ताह के दौरान सड़क सुरक्षा सप्ताह को मनाने की घोषणा की गई थी। इस अभियान का आयोजन करने का लक्ष्य सड़क सुरक्षा के लिए सिर्फ साधारण नियमों का पालन करने के द्वारा सुरक्षित सड़क यात्रा पर जोर देना था।

आंकड़ों के अनुसार यह दर्ज किया गया है कि, हर साल लगभग एक लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं, या उनमें से कुछ मानसिक आघात, याददाश्त में कमी, हाथ या पैर की हानि, पूरे जीवन भर के लिए परेशानी वाली समस्याओं से पीड़ित हो जाते हैं। इस तरह की स्थितियों के कारण, विशेषरुप से भारत में सड़क सुरक्षा के उपायों का महत्व और आवश्यकता बढ़ जाती है। भारत में सड़क पर यात्रा करने वालों की बहुत बड़ी जनसंख्या है, जैसे- दुपहिया वाहन, चार पैरों वाले वाहन आदि, इसलिए उन्हें और भी अधिक सड़क सुरक्षा के बारे में जानना चाहिए।

इसके लिए विभिन्न हितकारकों; जैसे- समुदायों, परिवहन क्षेत्र, बीमा क्षेत्रों, स्वास्थ्य क्षेत्रों, पुलिस, वैधानिक क्षेत्र, शैक्षणिक क्षेत्र, राजमार्ग के निर्माता अभियंता (इंजीनियर) वाहन निर्माता, सार्वजनिक एजेंसियाँ, गैर सरकारी संगठन आदि के प्रयासों की भी आवश्यकता है। सड़क सुरक्षा में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को बड़ा अवसर दिया जाता है, कुछ परिवर्तन लाने के लिए, देश के युवाओं सबसे पहले समझना चाहिए।

सड़क सुरक्षा सप्ताह को मनाने के उद्देश्य

  • सड़क सुरक्षा अभियान को मनाने का उद्देश्य समुदाय, स्कूल, कॉलेज, कार्यशालाओं, सड़कों आदि पर लोगों के बीच में सड़क सुरक्षा के साधनों को बढ़ावा देना है।
  • सड़क सुरक्षा साधनों का प्रयोग करने के द्वारा सड़क दुर्घटनाओं, सड़क दुर्घटना में मृत्युओं और चोटों को कम करने और पूरी तरह से हटाने के लिए।
  • सभी यात्रियों को यातायात के नियमों का पालन करने और ड्राइविंग के दौरान हेलमेट या सीट बेल्ट लगाने के लिए बढ़ावा देना।
    उन सुरक्षा के नए साधनों को लागू करने के लिए, जो सड़क दुर्घटनाओं को के खतरे, मृत्यु या चोट लगने को कम करने के लिए साबित हो चुके हैं।
  • सड़क दुर्घटनाओं को बचाने के लिए लोगों को वाहनों की गति सीमा के बारे में जागरुक करने के लिए।
  • लोगों को जागरुक करने के लिए कि थके होने पर या नशे में होने पर वाहन नहीं चलाए और वाहन चलाते समय फोन या रेडियो का प्रयोग नहीं करें।

जानियें भारत में सड़क सुरक्षा दिवस कैसे मनाया जाता है?

हमारे देश में भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, सड़क परिवहन मंत्रायल और राज्य सरकारों के साथ मिलकर भारत में हर वर्ष जनवरी के महीने में सड़क सुरक्षा दिवस का कार्यक्रम आयोजित करता है।

इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को सड़क सुरक्षा के प्रचार अभियानों के लिए सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं के द्वारा किया जाने वाला एक संयुक्त अभ्यास है, जोकि सड़क पर होने वाली घटनाओं को कम करने के लिए और लोगों में सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रति जागरुकता लाने के लिए मनाया जाता है।

कई सारे शहरों इस विषय में जनता को जागरुक करने के लिए कई सारे जागरुकता अभियान चलाये जाते है, जिसमें लोगों को यातायात नियमों और संकेतों के बारे में बताया जाता है। कई सारे स्कूल और कालेज इन अभियानों में हिस्सा लेते है और लोगों में सड़क सुरक्षा के पत्रक तथा पुस्तिकाएं बांटते है।

इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन द्वारा ड्राइवरों और मोटरसाइकिल चालकों का निरीक्षण अभियान भी चलाया जाता है और लोगों को शराब पीकर गाड़ी ना चलाने और दूसरें यातायात नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी जाती है। साथ ही चालकों को यातायात नियमों और संकेतो के विषय में जानकारी दी जाती है और सड़क पर अपनी सुरक्षा के साथ दूसरों के सुरक्षा का ध्यान रखने की भी हिदायत दी जाती है।

कारण जो दुर्घटनाओं को बढ़ाते है और इन्हें कैसे रोका जा सकता है?

ऐसे कई सारे कारण है, जिनके कारण सड़क पर कई सारी भीषण दुर्घटनाएं होती है। सड़क पर होने वाले इन प्रमुख दुर्घटनाओं के विषय में नीचे बताया गया है।

शराब पीकर गाड़ी चलाना

हर दिन लगभग लगभग 20 लोग भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां देते है। एक नशे धुत व्यक्ति या शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति काफी लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाता है, जिससे कि यह लोग ना सिर्फ वह अपनी बल्की की दूसरों की जान भी खतरें में डाल देते हैं। सड़क पर मात्र एक शराब पीकर मोटरसाइकिल चलाने या पैदल चलने वाला व्यक्ति भी कई सारी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

इसके रोकथाम के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा वाहन चालकों की नित्य रुप से निरीक्षण करना चाहिए ताकि पता चल सके की कही कोई व्यक्ति शराब पीकर वाहन तो नही चला रहा है और यदि कोई तय मात्रा से अधिक मात्रा में शराब पीकर गाड़ी चला रहा है तो उससे कड़ाई से पेश आना चाहिए और उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही वर्तमान में तय शराब मानक को और भी कम करने की आवश्यकता है ताकि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओँ में कमी लायी जा सकी।

अवयस्क वाहन चालक

भारत में गेयरचालित वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस पाने की पाने की उम्र 18 वर्ष तय की गई है। इसके साथ ही 50 सीसी के बिना गेयर वाले वाहनों के लिए यह उम्र 16 वर्ष है परन्तु, इसमें चालक के परिवार द्वारा अनुमति की आवश्यकता होती है। इसी तरह व्यवसायिक वाहन चलाने की उम्र 20 वर्ष तय की गई है। भले ही सरकार द्वारा लाइसेंस के लिए सही उम्र तय की गई हो पर कई लोग सरकारी अधिकारियों से साठगांठ करके और दलालों के माध्यम से कम उम्र में ही वाहन लाइसेंस प्राप्त कर लेते है। जिसके लिए वह अपने उम्र के फर्जी दस्तावेज प्रदान कर देते है, इस तरह के धांधली द्वारा ना सिर्फ वह अपने लिए खतरा उत्पन्न करते हैं बल्कि कि दूसरों के लिए भी काफी खतरा उत्पन्न कर देते है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

इसके लिए सरकार को सख्त निर्देश जारी करने चाहिए और लाइसेंस बिना वाहन चलाने वालों के खिलाफ एक सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है और इसके साथ ही जिन लोगों को लाइसेंस जारी किये जाये उनकी पृष्ठभूमि जांच अवश्य की जानी चाहिए। इसके साथ ही माता पिता को भी उनके बच्चों को बिना लाइसेंस के गाड़ी ना चलाने की शिक्षा दी जानी चाहिए और लोगों का लाइसेंस तभी बनाना चाहिए जब वह ड्राइविंग टेस्ट पास कर ले।

ध्यानपूर्वक गाड़ी ना चलाना

ध्यानपूर्वक गाड़ी ना चलाने के कई कारण है जैसे की गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करना, गाड़ी चलाते वक्त मैसेज भेजना, साथियों से बात करना, तेज आवाज में गाने बजाना ऐसे कार्य है जो दुर्घटनाओं को बढ़ाते है। आपको यह बात याद रखनी चाहिए की आप सड़क पर अकेले नही है, सड़क पर आपके अलावा कई लोग और जीव-जन्तु है, जोकि आपकी जरा सी लापरवाही के वजह से दुर्घटनाओँ का शिकार हो सकते है क्योंकि मात्र कुछ सेकेंड की लापरवाही आपके लिए घातक सिद्ध हो सकती है। एक अनुमान के अनुसार गाड़ी चलाने के दौरान मैसेज भेजने से दुर्घटना की संभावना 28 गुना बढ़ जाती है। एक ध्यानपूर्वक वाहन ना चलाने वाला चालक अपने साथ-साथ दूसरों की जान भी खतरे में डाल देता है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

इस तरह को दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे अच्छा उपाय अपनी आदतों में परिवर्तन लाना है जैसे कि गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात या मैसेज ना करना आदि। इसके साथ ही आपको अपने आस-पास के क्षेत्रों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। इसके अलावा प्रशासन द्वारा गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करने या मैसेज करने वालों पर जुर्मान भी लगाया जाना चाहिए और यदि इसके बाद भी उनमें कोई सुधार ना होतो उन्हें कारावास की सजा के साथ दंडित करना चाहिए। इसके साथ ही ऐसा करने वाले व्यक्तियों को उनके परिवार के द्वारा भी सजग किया जाना चाहिए।

व्यवहारिक कारण

इसके साथ ही कई लोग जानबूझकर यातायात नियमों का पालन नही करते है जैसे कि हेलमेंट नहीं पहनना, सीट बेल्ट ना लगाना, सिग्नल तोड़ना या प्रतिबंधित लेन में गाड़ी चलाना आदि। इस तरह की आदतें सड़क दुर्घटनाओं में जानलेवा साबित होती है क्योंकि एक अच्छा हेलमेट किसी प्रकार की दुर्घटना में आपके सर की किसी भयंकर चोट से रक्षा करता है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

यातायात उल्लंघन को रोकने कानून स्थापित करने वाली संस्थाओं को नियमित रुप से इस विषय में जांच करते रहना चाहिए और जो व्यक्ति बिना हेलमेट या बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाते हुए पकड़ा जाये उसपर भारी जुर्माना लगाया जाये ताकि वह दोबारा ऐसी गलती ना करे। विद्यालयों में इस विषय को लेकर नियमित रुप से कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिए ताकि लोगों को इन नियमों के विषय में जागरुक किया जा सके।

पैदल यात्री और छुट्टा पशु

कई बार अनियमित पैदल यात्री भी सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते है। एक अनियमित या नशे में धुत पैदल यात्री अपने साथ-साथ कई दूसरे वाहन और मोटरसाइकिल चालकों की भी जान खतरे में डाल देता है। कई सारी दुर्घटनाएं ऐसे मामलों में लोगों की जान बचाने के प्रयास में होती है। इसके साथ ही भारत एक ऐसा देश है जिसकी 70 प्रतिशत आबादी गाँवों में रहती है, इसलिए यह काफी स्वाभाविक है की कई जगहों पर सड़क के दोनो किनारे गाँव स्थित हों। जिसके कारण कई बार राजमार्गो और राष्ट्रीय मार्गों पर एकाएक से छुट्टे पशु और बच्चे आ जाते है। जिससे की वाहन चालकों को वाहन रोकने का बहुत ही कम समय मिलता है, कई बार तो यह इतना कम होता है कि दुर्घटना को टालना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

इसे रोकने के लिए निचले स्तर पर जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें गांवो में जाकर लोगो को छुट्टा पशुओं द्वारा होने वाली दुर्घटनाओं के विषय में जागरुक करना होगा, इसके साथ ही हमें उन्हें दुर्घटनाओं में पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिवार पर होने वाले मानसिक और शारीरिक आघात के विषय में बताना होगा। इसके अलावा निवास स्थानों के पास के सड़को पर बेरिकेडिंग की जानी चाहिए, जिससे की सड़को पर जानवरों और मनुष्यों को ऐका-एक आने से रोका जा सके। इसके साथ ही वाहन चालकों को भी सड़क संकेतो और गति क्षमता के विषय में पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि ऐसे आबादी वाले क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लायी जा सके। एक प्रकार से हम कह सकते हैं कि हम लोगो में जागरुकता लाकर इस प्रकार की सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी ला सकता है।

असुरक्षित वाहन

कई सारे असुरक्षित और बिना ठीक-ठाक से रखाव वाले व्यवसायिक वाहन सड़को पर कई तरह के दुर्घनाएं उत्पन्न करते है। इस तरह के वाहन सड़को पर अवैध रुप से चल रहे होते है और लोगो के यातायात या मालढुलाईं का काम कर रहे होते है। किसी भी पुराने और जर्जर वाहन में कही भी किसी तरह की दुर्घटना हो सकती है जैसे ब्रेक ना लगना टायर क्षतिग्रस्त होना आदि। इस तरह के वाहन उन्हें चलाने वालो के साथ ही दूसरों की जान भी खतरे में डाल देते है।

इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है

इस विषय में स्थानीय यातायात प्रशासन को सख्त कदम उठाना चाहिए और ऐसे वाहनों की जांच करके उन्हें जब्त करना चाहिए। अपने फायदे के लिए दूसरों के जान को खतरे में डालना कानून के अनुसार एक जुर्म है। सड़क पर चल रहे हर वाहन के फिटनेस सर्टीफीकेट की जांच करना आवश्यक है। फिटनेस सर्टीफिकेट हर वाहन के लिए आवश्यक होना चाहिए और इसमें किसी को भी किसी तरह की छूट नही मिलनी चाहिए।

सड़कों पर कैसे सुरक्षित रहे और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या करें?

नीचे कुछ बिदुंओं पर चर्चा की गयी है जिनपे अमल करके हम सड़क दुर्घटनाओं को रोक सकते है-

  • मोटरसाइकिल या बाइसाइकल पर हमेशा हेलमेट लगाना चाहिए।
  • पीछे बैठे सवार को भी हेलमेट पहनाना चाहिए।
  • वाहन के क्षमता से ज्यादे लोगों को उसमें नही बैठना चाहिए।
  • वाहन चलाते वक्त अपने आस-पास के माहौल के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
  • किसी द्वारा गलत तरीके से वाहन चलाने पर इस विषय में प्रशासन को तत्काल सूचित किजिए।
  • यातायात सिग्नल और सड़क संकेतो के विषय में पूर्ण जानकारी रखिये।
  • हमेशा सड़क संकेतो और गतिसीमा के नियमों का पालन किजिए।
  • कभी भी यातायात सिग्नल मत तोड़िये भले ही आपको कोई ना देख रहा हो तोभी, हमेशा याद रखियें की यह आपकी खुद के सुरक्षा के लिए है।
  • हमेशा अपने वाहन और मोटरसाइकिल को पूर्ण रुप से अच्छा रखिये।
  • हमेशा सीट बेल्ट बांधिये और इसे अपनी आदत बना लिजिए भले ही आप शहर के अंदर ही गाड़ी क्यों ना चला रहे हों।
  • दूसरे यात्रियों को भी यातायात सुरक्षा के नियमों के विषय में जानकारी दिजिए।
  • इसके साथ ही गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करना मैसेज करना या तेज आवाज में गाना सुनने की आदत को पूर्ण रुप से त्याग दिजिए।
  • कभी शराब पीकर गाड़ी मत चलाइये।
  • अगर आपकों नीद लग रही हो या चक्कर आ रहा हो तो गाड़ी मत चलाइये।
  • वाहन चलाते वक्त सतर्क और सुरक्षित रहिये।
  • सड़क पर निकलने से पहले अपने वाहन के इंडिकेटर और बैकलाइट की जांच अवश्य कर लें।
  • गांव या शहर के आस-पास वाहन चलाते वक्त हमेशा सतर्क रहें।
  • वाहन चलाते वक्त हमेशा छुट्टा पशुओं और पैदल चलने वालों का ध्यान रखे।
  • रांत के समय साईकल चालकों का हमेशा ध्यान रखे।
  • कभी भी तेज गति से वाहन ना चलायें भले ही रोड खाली ही क्यों ना हो क्योंकि दुर्घटना एक गड्डे और एकाएक लगने वाले झटके से भी हो सकती है।
  • अपने साथ-साथ दूसरों के सुरक्षा का भी ख्याल रखे।
  • कभी भी खस्ताहाल सवारी वाहनों में यात्रा ना करें
  • खराब स्थिति वाले वाहन दिखने पर संबंधित प्रशासन को सूचित करें।

संयुक्त राष्ट्र का पहला वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह

संयुक्त राष्ट्र का पहला वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह सन् 2007 में 23 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक मनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व भर में होनी वाली दुर्घटनाओं को कम करना था, इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कई सारी सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं और निजी संस्थाओं ने इस विषय पर मिलकर काम किया था। तब से लेकर अबतक कई सारे देशों में अलग-अलग महीनों में सड़क सुरक्षा सप्ताह का यह कार्यक्रम मनाया जाता है। इन देशो में बोस्टवाना, मैक्सिको, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, मैक्सिको आदि जैसे देश शामिल है, जो लोगों में सड़क सुरक्षा के विषय में जागरुकता लाने के लिए काफी काम करते है।

निष्कर्ष

सड़क सुरक्षा सप्ताह एक ऐसा अवसर है जब हम जीवन और इसके सुरक्षा का महत्व समझ सकते है और इस बात पर विचार कर सकते हैं कि यातायात नियमों का पालन करके हम ना सिर्फ अपनी जान बचा पायेंगे बल्कि की दूसरों की भी रक्षा कर पायेंगे। अगर आप प्रत्यक्ष रुप से इन अभियानों में शामिल नही हो पाते है तो भी आप इन नियमों को मानकर इसमें काफी सहयोग दे सकते है। चाहे कितने भी नियम बना दिये जाये पर आपको यह बात याद रखनी चाहिए की आपके जीवन की सुरक्षा आपके खुदके हांथ में होती है और यातायात नियमों का पालन करके आप अपने साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा में भी योगदान देंगे।