मनुष्य पर निबंध – Essay On Man In Hindi

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मनुष्य पर निबंध – Short Essay On Man In Hindi

विश्व के प्रारंभ में सबसे पहला मानव मनु को माना जाता है।जब विश्व का आरंभ हुआ था तब बहुत कुछ इस धरती पर जन्मा था जैसे पशु-पक्षी,जीव-जंतु आदि। इनमे से सबसे अलग और बुद्धिमान प्राणी यदि कोई था तो वह मनुष्य था।

प्रारंभ से लेकर अब तक मनुष्य की सोच में काफी बदलाव देखने को मिला है। उसका दिमाग एवं उसकी सोच विकसित हुई है। उसकी मानसिकता कई मायनों में पिछड़ेपन और रूढ़िवादिता से मुक्त होकर आधुनिकता में आई है। पहले मनुष्य आदि मानव थे गुफाओं में, जगंलों में भटक-भटक कर भोजन की खोज करते थे।

फल,फूल,पत्तों और जानवरों की चमड़ी का सेवन करते थे। पर अब परिवर्तन के बाद मनुष्यों ने आग का अविष्कार किया और अपना भोजन स्वयं पका कर खाने लगे।

ऐसा माना जाता है किरे-धीरे वह अपने दिमाग से सोचने लगा और इतना बुद्धिमान हो गया कि विश्व की हर चुनौती का सामना करने को तैयार है। पहले मानव गुफाओं में रहते थे पर अब उन्होंने अपने रहने के लिए आलीशान आशियानों का निर्माण करना आरंभ कर दिया है। मनुष्य उड़ नही सकता पर उसने ऐसे साधन बना लिए है जो उसके उड़ने की इच्छा को पूरा करते है।

मनुष्य आज प्रगति के सबसे ऊंचे शिखर पर है। उसने अपने दिमाग का प्रयोग करके कई जरूरी एवं फायदेमंद चीजों का निर्माण कर लिया है जैसे कि फ़ोन,बिजली,दूरदर्शन,इंटरनेट, कंप्यूटर आदि।

आज के आधुनिक युग में मानव के लिए कुछ भी असंभव नही है। वह सबसे शक्तिशाली है। उसने हर नामुमकिन को मुमकिन किया है। विश्व में जितने भी जीजन्तु है मानव उनकी तुलना में अलग है क्योंकि उसके पास दिमाग है जो अन्य किसी के पास नही है।

परंतु दुख की बात तो यह है कि वर्तमान समय में मानव अत्यधिक लोभी है।  अपनी ही बनाई चीजों का प्रयोग इतना अधिक करने लगा है कि फायदे के स्थान पर नुकसान अधिक हो रहा है जैसे उसने वाहन बनाये ताकि यात्रा सुगम हो सके पर अब वह उस वाहन का गलत तरीके से इतना अधिक प्रयोग करने लगा है कि थोड़ी दूरी के लिए भी उसे गाड़ी की आवश्यकता पड़ रही है।

वाहन का इतना अधिक प्रयोग प्रदूषण का कारण बनता जा रहा है। मानव प्राकृतिक पर्यावरण को अपने गलत प्रयोगों से काफी नुकसान पहुँचा रहा है। वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट बताया है कि यदि ऐसा चलता रहा तो मानव का धरती पर रहना दुर्लभ हो जाएगा उसे किसी अन्य ग्रह में रहना होगा।

पाश्चात्य युग में मानव अपने त्याग के लिए जाने जाते थे उदाहरणस्वरूप हम महर्षि धधिची को देखते है जिन्होंने विश्व कल्याण हेतु अपनी अस्थियों का दान कर दिया था। राजा हरिश्चंद्र जो सत्यवादी थे और इन सबके बाद आज भी विश्व का सबसे उत्तम एवं मर्यादापुरुषोत्तम पुरूष भगवान राम को माना जाता है। उनका पूरा जीवन ही हमारे लिए प्रेरणा स्त्रोत है ।

भगवान राम ने हमे हर नाते का सम्मान करना सिखाया है। मानव चाहे तो कुछ भी कर सकता है हर असंभव को संभव कर सकता है उसकी इसी शक्ति का एहसास दिलाते हुए कवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता वीर में लिखा है-

खम ठोक ठेलता है जब नर,
पर्वत के जाते पाव उखड़,
मानव जब ज़ोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है।।

मनुष्य ने निश्चित रूप से बहुत विकास किया है । शुरुवाती समय के मनुष्य निश्चित रूप से आधुनिक मनुष्यों की तुलना में शारीरिक रूप से स्वस्थ थे पर यदि मानसिक पहलू की बात की जाए तो यह समय के साथ कई अधिक बढ़ा है। मनुष्य का विकास कोई चमत्कार से कम नही है। प्रारंभ में प्रकृति ने मनुष्य के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई है पर आने वाले समय में ऐसा लगता है कि मनुष्य अपने बुद्धिमानी के कारण अपने विकास के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा।

मनुष्य की योग्यता, त्याग एवं बलिदान को लक्ष्य करके राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने अपनी कविता मनुष्यता को लिखा है। इसकी एक पंक्ति दृष्टव्य है-

मनुष्य वही जो मनुष्य के लिए मरे

मनुष्य ईश्वर की सबसे अद्भुत रचना है। आज के समय में ऐसा कुछ भी नही जो मानव ना कर ,सके कोई ऐसा क्षेत्र नही है जिसमे मानव पीछे हो। इसने अपने जीवन को मनोरंजक एवं आरामदायक बनाने के लिए कई चीज़ों का आविष्कार किया है परंतु  इसके साथ ही वातावरण को दूषित भी किया है।

मनुष्य सदैव ही समूह में रहना पसंद करता है इससे वह खुदको सुरक्षित महसूस करता है। आज उसकी इसी पसंद ने सामाजिकता का रूप धारण कर लिया है।मनुष्य के जीवन में समाज,परिवार,और संस्कृति का बहुत महत्व है। कोई भी मनुष्य अकेला रहना नही चाहता है। अकेलापन मानसिक तनाव का कारण बन जाता है।

पहले के समय में लोग संयुक्त परिवार में रहते थे इसके फायदे भी कई है जैसे इससे बच्चों को सही शिक्षा प्राप्त होती है ,अपनी संस्कृतियों का ज्ञान होता है। संयुक्त परिवार में रहना बुजुर्गों के लिए भी फायदेमंद रहा है।आज की युवा पीढ़ी किंतु अलग रहना पसंद करती है पर इसका अर्थ ये नही है कि उन्हें लोगो के साथ बातचीत करना पसंद नहीं है वह तो सिर्फ इसलिए कि वे अपनी ज़िंदगी अपनी इच्छा से जीना चाहते है,अपनी स्वतंत्रता चाहते है।

मनुष्य के दिमाग का विकाश तेज़ी के साथ हो रहा है और अब उसे यह चाहिए कि वह हर चीज़ का निर्णय सोच समझ कर ले और पर्यावरण को प्रदूषित न करे साथ ही एक स्वस्थ, समृद्ध जीवन के साथ विश्व का कल्याण करे।


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