हनुमान जयंती पर निबंध – Essay On Hanuman Jayanti in Hindi

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आप सभी लोगों ने लोगों ने अपने बड़ों को अक्सर कहते हुए सुना होगा कि हनुमान चालीसा पढ़ने से भूत प्रेत पास नहीं आते है। जब भूत प्रेत कुछ नहीं होता है। ये तो हिन्दू धर्म में भगवान हनुमान जी के प्रति हमारा विश्वास और भक्ति है। हिन्दूओं में हनुमानजी को बहुत ही श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। और इनके जन्म उत्सव को  “हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं।

हनुमान जयंती पर निबंध – Long and Short Essay On Hanuman Jayanti in Hindi

हनुमान जी की जन्म दिन को हम हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं। हम इसे मार्च- अप्रैल महीने में मनाते हैं लेकिन तमिलनाडु और केरल में इसे जनवरी या फरवरी महीने में मनाया जाता है। हनुमान जी को बहुत सारे नाम से जानते हैं जैसे संकट मोचन, बजरंग बली, पवनसुत, केसरी, रामभक्त आदि। ये सारे नाम इनके द्वारा किए गए अनोखे और मनमोहक कार्यों के वजह से मिले हैं। हनुमान जी पूजा खास तौर पर मंगलवार और शनिवार को की जाती है।

हनुमान जयंती का उत्सव कैसे मनाते हैं?

हनुमान जयंती के अवसर पर हनुमान जी परम श्रद्वा रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले ही हनुमान जी के मंदिर में पूजा अर्चना के लिए चले जाते हैं। इस दिन घरों, छोटी बड़ी कंपनियों, मंदिरों, और अखाड़े में बहुत उत्सुकता और धूमधाम से मनाया जाता है। शहरों में बड़ी कंपनियों द्वारा भंडारा आयोजित किया जाता है और ये भंडारा मंगलवार या शनिवार के दिन आयोजित किया जाता है।

हनुमान जयंती एक हिन्दू त्यौहार है जो भारत और नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार भगवान हनुमान के जन्म अवसर पर मनाया जाता है जो भारत और नेपाल के एक लोकप्रिय हिन्दू देवता हैं। स्थान के अनुसार रीती-रिवाज बदल सकते हैं लेकिन शक्ति और साहस के देवता हनुमान जी का आशीर्वाद मांगना सभी के लिए एक बराबर है।

निबंध 1: हनुमान जयंती पर निबंध – Essay On Hanuman Jayanti in Hindi

भगवान हनुमान एक पवित्र और सबसे सम्मानित हिंदू भगवान हैं, जिनके मंदिर आमतौर पर राष्ट्र के हर छोटी बड़ी जगहों पर पाए जाते हैं। हनुमान जयंती एक जश्न का अवसर है जब सभी हिंदू लोग भगवान हनुमान के जन्म का जश्न मनाते हैं।

हनुमान जयंती – शक्ति प्राप्त करने का पर्व

भगवान हनुमान अपने कौशल और बुद्धि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अकेले ही पूरे लंका को जला दिया और यहां तक ​​कि महाशक्तिशाली रावण भी उन्हें नहीं रोक पाया। वह शक्तिशाली होने के साथ ही शांत और सौम्य भी है।

हिंदू धार्मिक ग्रंथों और हनुमान चालीसा में, यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि हनुमान अपने पूजक को शौर्य, साहस और जीवन शक्ति प्रदान करते है। वह अपने भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते है और खुशी तथा संतोष लाते है।

उन लोगों के लिए जो अपने रोजमर्रा के जीवन में काफी व्यस्त हैं रहते हैं और हर रोज हनुमान जी की पूजा नही कर पाते; उनके लिए हनुमान जयंती एक बेहतर अवसर है ताकि अपने सारी गलतियों की माफ़ी मांगकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

यह त्योहार हमें क्या सिखाता है?

हनुमान जयंती आध्यात्मिक रूप से भगवान हनुमान से जुड़ने और उनके गुणों को याद करने का एक अवसर है। अपार ताकत होने के बावजूद, वह एक नदी की तरह शांत थे। उन्हें अपने कौशल पर कभी कोई गर्व नहीं रहा है और इसका उपयोग वो केवल दूसरों के हित के लिए करते है। यह त्योहार हमें स्वयं को भगवान हनुमान के रूप में आध्यात्मिक और मानसिक रूप से विकसित होना सिखाता है। यह हमें भगवान हनुमान पर पूरा भरोसा बनाये रखते हुए कठिन परिस्थितियों में धर्य और शांतचित्त रहना सिखाता है और इससे बाहर निकलने की योजना बनाना भी सिखाता है।

निबंध 2: हनुमान जयंती पर निबंध – Essay On Hanuman Jayanti in Hindi

हनुमान जयंती एक हिंदू त्योहार है जो भगवान हनुमान के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वह ऐसे हिंदू भगवान हैं जिनमे ज्यादा से ज्यादा लोगों की श्रद्धा है और हर दिन अरबों भक्तों द्वारा उनकी पूजा की जाती है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि भारत के तमाम कस्बों और गांवों में भगवान हनुमान का मंदिर ढूंढना एक आम बात है।

हनुमान वर्धन्ति

दक्षिण भारत के कई राज्य हनुमान जयंती को हनुमान वर्धन्ति के रूप में मनाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका मानना ​​है कि जयंती किसी ऐसे व्यक्ति के लिए मनाई जाती है जो अब जीवित नहीं है। विरोधाभासी तौर पर, भगवान हनुमान अमर हैं और अभी भी ऐसा माना जाता है कि वे इस ग्रह पर रहते हैं, इसलिए उनकी जयंती मनाना न्यायसंगत नहीं है। इसलिए वे उनके जन्म को हनुमान वर्धन्ति के रूप में मनाते हैं।

विश्वासों में विविधता

भगवान हनुमान के जन्म को लेकर जो आस्था है वो मुख्य रूप से दो अवधारणाओं पर विभाजित हैं। धार्मिक तपस्वियों के एक समूह का मानना​​है कि भगवान हनुमान का जन्म हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने में पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए वे इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं।

एक अन्य समूह का मानना ​​है कि भगवान हनुमान का जन्म अश्विन महीने के पखवाड़े के चौदहवें दिन (चतुर्दशी) को हुआ था जो आमतौर पर दिसंबर महीने के आसपास आता है।

तमिलनाडु जैसे दक्षिण भारत के राज्य में हनुमान जयंती उनके वास्तविक जन्म के दिन नहीं बल्कि उस दिन मनाई जाती है, जिस दिन हनुमान जी, भगवान राम से मिले थे।

हनुमान जयंती की रस्म रिवाज

हनुमान जयंती के रस्म रिवाज भी कई अन्य हिंदू त्योहारों की तरह ही शुभ और आध्यात्मिक होते हैं। बजरंगबली की जयंती मनाने के सभी रस्म रिवाज भोर से शुरू हो जाते है क्योकि इसी दौरान उनका जन्म हुआ था। सभी भक्त सुबह जल्दी नहाते हैं और सुबह सबसे पहले हनुमान जी की पूजा करते हैं। इस दिन वे शराब पीने, धूम्रपान करने और मांसाहारी भोजन करने से परहेज करते हैं। भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और अपना अधिकांश समय हनुमान जी की पूजा में व्यतीत करते हैं।

हनुमान चालीसा, जो भगवान हनुमान का भक्तिमय भजन है, और हमेशा से सबसे अधिक पढ़े जाने वाले हिंदू धार्मिक ग्रंथों में से एक है उसका पाठ किया जाता है। भगवान हनुमान की मूर्तियों को सिंदूर से सजाया जाता है और उन्हें नए वस्त्रों तथा मालाओं से सजाया भी जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त भी हनुमान मंदिरों में आते हैं। परिवारों को अपने सबसे प्रिय भगवान की पूजा करने के लिए मंदिरों की ओर जाते देखा जा सकता है।

हनुमान जयंती हिंदुओं के लिए अपने पूजनीय भगवान हनुमान जी की पूजा करने का एक शुभ अवसर है। इस दिन वो अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय निकालकर भगवान हनुमान के असमान कार्यों और साहस को याद करते हैं तथा उनका आशीर्वाद भी मांगते हैं।

निबंध 3: हनुमान जयंती पर निबंध – Essay On Hanuman Jayanti in Hindi

हनुमान जयंती एक हिंदू त्योहार है जो सम्मानित हिन्दू देवता-भगवान हनुमान के जन्म का स्मरण कराता है; जिन्हें भगवान राम के मित्र और साथी के रूप में भी जाना जाता है। यह भारत के सभी राज्यों में विभिन्न परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस निबंध में, आज हम आपको इस महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार के बारे में विस्तार से बताएँगे।

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

समस्त भारतीय राज्यों में अलग-अलग महीनों में हनुमान जयंती मनाई जाती है। हालाँकि, उत्तर और मध्य भारत के लोगों सहित कई भारतीय राज्य हिंदू पंचांग या कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने में पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाते हैं। चैत्र माह मार्च-अप्रैल के ग्रेगोरियन महीनों के साथ मेल खाता है।

दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु और केरल में, हनुमान जयंती को धनु में मनाया जाता है, जिसे हिंदू कैलेंडर के मार्गाज़ी महीने के रूप में भी जाना जाता है, जो ग्रेगोरियन दिसंबर महीने के साथ मेल खाता है।

भगवान हनुमान जी के जन्म के संबंध में दो मान्यताएं हैं। कुछ धार्मिक गुरुओं का मानना ​​है कि उनका जन्म आश्विन माह के अंधेरी रात में चतुर्दशी (चौदहवें दिन) को हुआ था; जबकि कुछ का मानना ​​है कि हनुमान जी का जन्म चैत्र माह में पूर्णिमा के दिन हुआ था।

हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है

भगवान हनुमान भारत और नेपाल दोनों में हिंदुओं के एक उच्च आदरणीय भगवान हैं। वे इतने ज्यादा सम्मानित है कि उत्तर भारत में हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर आपको भगवान हनुमान का एक मंदिर मिल जाएगा। मंदिर बड़े या छोटे भी हो सकते हैं; फिर भी, वे वहां मौजूद हैं, जो हनुमान जी के प्रति लोगों के प्यार और भक्ति को दर्शाता है।

हनुमान जयंती के दिन, भक्त हनुमान मंदिरों में जाते हैं और भगवान हनुमान को फल और मिठाई चढ़ाते हैं, जिसका एक हिस्सा प्रसाद के रूप में लिया जाता है। हर हनुमान मंदिर को फूलों और आम के पत्तों से बहुत ही खूबसूरती के साथ सजाया जाता है, जो इसे एक उत्सव का रूप देता है। हनुमान जयंती समारोह का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा भी है जिसमे भक्तों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। भक्त हाथ जोड़कर हनुमान चालीसा पढ़ते हुए देखे जा सकते थे। कुछ मंदिर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं, जिसमें रामायण और हनुमान चालीसा के छंदों को धार्मिक उत्साह के साथ भक्तों द्वारा पढ़ा जाता है।

सुबह से चलने वाले इस पर्व के दौरान दिन में सामुदायिक भोजन की भी व्यवस्था की जाती है जो हनुमान जयंती समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। मंदिरों द्वारा भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाने वाला भोजन तैयार कराया जाता हैं। इसमें कोई भेदभाव नहीं होता है और किसी भी जाति, पंथ या धर्म से संबंधित लोगों का प्रसाद लेने के लिए खुले दिल से स्वागत किया जाता है। किसी एक क्षेत्र के निवासियों के कई समुदाय और छोटे-छोटे समूह हनुमान जयंती मनाने के लिए चंदा तथा अन्य तरह से योगदान करते हैं।

प्रमुख मंदिर भगवान हनुमान के जन्म का जश्न मनाने के लिए विशेष कार्यक्रमों की व्यवस्था करते हैं। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम की तरह, श्री प्रसन्ना अंजनेय मंदिर में पूजा-अर्चना और अभिषेक की व्यवस्था की जाती है।

हनुमान जयंती का महत्व

भगवान हनुमान को भगवान राम के प्रति असीम भक्ति के लिए जाना जाता है। वह अपने प्रचंड भुजबल के साथ-साथ अपने शांत स्वभाव के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी विचारधारा के मूल में सच्चाई, ईमानदारी और भक्ति है। वह ‘संकट मोचन’ के रूप में पूजनीय हैं या उस रूप में जो बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करता है, भक्तों को शक्ति और साहस का आशीर्वाद देता है।

भगवान हनुमान की पूजा करने से उन भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति मिलती है जो किसी न किसी कारण से अपने निजी जीवन में कठिन समय से गुजर रहे हैं। उन लोगों के लिए जिनका जीवन ठीक-ठाक चल रहा हैं, यह दिन हनुमान जी का आशीर्वाद मांगने का अवसर होता है, जो जीवन को आगे ले जाने के लिए, बाधाओं से मुक्त है।

दूसरे शब्दों में, हनुमान जयंती लोगों के बीच सद्भाव में सुधार करती है, जो अपने जनसांख्यिकीय विभाजन को कम करते हैं और हनुमान जी के जन्म का जश्न मनाने के लिए एक साथ आते हैं।

निष्कर्ष

हनुमान जी पर सभी छोटे से बड़े लोगों की श्रद्धा होती है। संकट के समय में सबसे पहले हम संकट मोचन हनुमान जी को ही याद करते हैं। हिंदू धर्म में लगभग सभी लोगों को हनुमान चालीसा याद है।

हनुमान जयंती एक महत्वपूर्ण अवसर है जब हिंदू अपने सबसे प्रिय भगवानों में से एक का सम्मान करते हैं। हनुमान जी सबसे प्रतिष्ठित हिंदू देवता हैं और उनका जन्मदिन अद्वितीय भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। उनकी पूजा किसी को भी एक साहसी बनाता है और जीवन से अवांछित बाधाओं को दूर करता है।

“जय जय हनुमान गोसाईं,  कृपा करो गुरु देव की नाही। “

इस प्रकार की बहुत सारी चौपाई हनुमान जी को समर्पित है।


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