सौर ऊर्जा क्या है और इसका उपयोग कैसे करे? पूरी जानकारी

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पृथ्वी तक पहुँचने वाला सूर्य प्रकाश और उसमे स्थित उष्मा ही सौर ऊर्जा कहलाती है। पृथ्वी पर सौर ऊर्जा ही एकमात्र ऐसा ऊर्जा स्रोत है जो अन्य ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध है। सूर्य से पृथ्वी पर अधिक मात्रा में ऊर्जा पहुँचती है तथा पृथ्वी पर इसका उपयोग विद्युत् बनाने के लिए भी किया जाता है।

सौर ऊर्जा क्या है? (Saur Urja Kya Hai)

विज्ञान एवं तकनीक में होने वाले विकास की सहायता से मनुष्य ने ऐसी तकनीक बना ली है जिसके द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने वाली सूर्य की किरणों को विज्ञान एवं तकनीक की मदद से विद्युत्  बनाया जाता है। प्रति वर्ष सूर्य से पृथ्वी पर पहुंचने वाली ऊर्जा की मात्रा धरती पर उपलब्ध  समस्त कोयले, तेल, गैस आदि से 130 गुना अधिक है होती है।

पृथ्वी पर पड़ने वाली यह सूरज की किरणें कई हज़ारों वर्षों से यहाँ उपलब्ध हैं तथा वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले तकरीबन 500 से 700 करोड़ वर्षो तक सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर उपलब्ध रहेगा। और इसी प्रकार हम सौर ऊर्जा से विद्युत् निर्मित कर अपनी  आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाएंगे।

संपूर्ण विश्व में सौर ऊर्जा का चलन अब तेज़ी से विकसित रहा है क्योंकि लोग अब पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक हुए हैं तथा पारंपरिक ऊर्जा स्रोत से मिलने वाली बिजली की कीमत ज़्यादा होने के कारण भी दुनिया के लोग सौर ऊर्जा को अधिकतम उपयोग में ले रहे हैं।

यदि कोई कोई देश विकसित देशों की श्रेणी में आना चाहता है तो उसके लिए ऊर्जा के पर्याप्त स्रोत का होने अति आवश्यक है। ऐसे में सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग करने वाला मुल्क विकसित मुल्क बनने की ओर एक कदम और आगे बढ़ जाता है। सौर ऊर्जा से विद्युत् निर्मित  करने के लिए सोलर पैनलों को  उपयोग में लाया जाता है जिसमे फोटोवोल्टिक सेल लगे होते हैं और ये सेल सोलर पैनल पर पड़ने वाली धूप को विद्युत् में परिवर्तित कर देते हैं।

यदि आप भी पहली बार सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली को उपयोग में लेना चाहते हैं और अपने घर में सौर पैनल लगवाना चाहते हैं तो ज़ाहिर सी बात है कि आपको सौर ऊर्जा, सौर पैनल आदि के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। यहाँ हम आपको सौर ऊर्जा के बारे में विस्तार से बताएँगे।

सौर ऊर्जा क्या है?

सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से मिलती है। सौर ऊर्जा परही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन भी होता है। यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन जैसे पेड़-पौधे और जीव-जन्तु  का आसरा है।वैसे तो सौर उर्जा का विविध रूप में उपयोग किया जाता है, परंतु सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को ही मुख्य रूप से सौर उर्जा को ही सौर ऊर्जा कहते हैं।

सूर्य के प्रकाश को दो प्रकार से विदुत उर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

  • प्रथम प्रकाश-विद्युत सेल की मदत से
  • और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जनित्र चलाकर।

सौर उर्जा सबसे सबसे बेहतर उर्जा माना जाता है। यह विश्व के भविष्य में उपयोग करने वाली उर्जा है।

सौर ऊर्जा का उपयोग

सौर ऊर्जा में जो प्रकाश व उष्मा जिस रूप में मिलती है, इसका उपयोग कई प्रकार से हो सकता है। सौर प्रकाश के उष्मा का उपयोग अनाज की सुखाई, पानी का गर्म करना आदि कई रूप में होता है तथा उसके साथ साथ तथा विद्युत ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। फोटो वोल्टायिक प्रणाली द्वारा सूर्य के प्रकाश को विद्युत में रूपान्तरित करके भी बिजली से होने वाले अन्य उपयोग में भी लाये जा सकते  है, इस से निर्मित बिजली को अन्य न जाने कितने जगह उपयोग कि जा सकते है, जैसे टेलीफोन, टेलीविजन, रेडियो आदि चलाए जा सकते हैं, तथा पंखे व जल-पम्प आदि भी चलाए जा सकते हैं।

सौर ऊर्जा से गरम जल की प्राप्ति होती ही है साथ साथ सौर-उष्मा पर आश्रित तकनीक और उद्योग के साथ इसका उपयोग घरेलू, व्यापारिक व औद्योगिक क्षेत्र बड़े पैमाने पर किया जाता है। लगभग 4,75,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के सौर जल उष्मा को संगृहीत करने लिए संस्थापित किए जा चुके हैं जो रोजाना 220 लाख लीटर जल को 60 से 70 सेल्सियस  तक गरम करता हैं।

भारत सरकार का गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय इस ऊर्जा के साधन को को उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहन देने के लिए प्रौद्योगिकी विकास,आर्थिक एवं वित्तीय प्रोत्साहन के साथ साथ जन-प्रचार आदि कार्यक्रम चलाए जा रहें हैं। इसके परिणाम स्वरूप प्रौद्योगिकी को अब लगभग परिपक्वता प्राप्त मिल गयी है तथा इसका बेहतर उपयोग और आर्थिक लागत में भी काफी परिवर्तन हुआ है।

बड़े पैमाने पर  क्षेत्र-परिक्षणों द्वारा यह सिद्ध हुआ है कि रहने वाले भवनों, रेस्तराओं, होटलों, अस्पतालों व अन्य विभिन्न उद्योगों खाद्य, औषधि, वस्त्र, डिब्बा बन्दी, आदि के लिए यह एक उचित प्रौद्योगिकी के रूप में है। जब हम सौर की उष्मा से जल गर्म करते हैं तो इससे जब बिजली की ज्यादा जरूरत पड़ती है उस समय सौर ऊर्जा का उपयोग   बहुत ही बड़े पैमाने पर बिजली बचाई जा सकती है। सौर ऊर्जा लगाने से कार्बन डाइऑक्साइड की भी  उत्सर्जन में हर वर्ष 1.5 टन की कमी हो जाएगी। सौर ऊर्जा संयंत्रों का जीवन-काल लगभग 22 से 22वर्ष का होता है

सौर ऊर्जा से संबंधित यह लेख सौर ऊर्जा क्या है और सौर ऊर्जा का उपयोग कहां कैसे किन-किन क्षेत्रों में होता है उसके बारे में हैं। हम आशा करते हैं कि सौर ऊर्जा संबंधी जानकारी के लिए यह लेख काफी कारगर सिद्ध होगा।


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