राजीव गाँधी का जीवन परिचय – Rajiv Gandhi Ka Jivan Parichay

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राजीव गाँधी का जीवन परिचय – Rajiv Gandhi Ka Jivan Parichay in Hindi

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 में मुम्बई में हुआ था। उनकी माता श्रीमती इंदिरा गांधी थी जो कि पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की सुपुत्री थी और राजीव गांधी के पिता फ़िरोज़ गांधी थे। उनके जन्म के समय उनके नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू जेल में थे। उनके माता-पिता भी कुछ समय पूर्व ही जेल से छूटकर आये थे। वे सब भारत के स्वतंत्रता संग्राम के हिस्सा थे।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के एक विद्यालय शिवनिकेतन विद्यालय में हुई थी। सं १९५४ में राजीव गांधी जी आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून चले गए। वे पढ़ने में काफी तेज थे और परीक्षा उत्तीर्ण कर वे कैंब्रिज से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड चले गए। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने विमान संचालन की शिक्षा भी ग्रहण की थी और इंडियन एयरलाइन्स में बतौर पायलट कार्यरत भी रहे।

भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती होने के बावजूद ये अपना जीवन सादे और सरल तरीके से व्यतीत करने में विश्वास करते थे। दूसरे विद्यार्थियों की भांति ही ये भी पैसों को काफी सोच समझकर खर्च करते थे।

वे बहुत ही उदार स्वभाव के व्यक्ति थे। इनका पालन-पोषण राजनीतिक मंडल के इर्द-गिर्द ही हुआ परंतु फिर भी उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं थी परंतु समय को कुछ और ही मंजूर था फ़िरोज़ खान की मृत्यु के पश्चात अपनी माँ इंद्रा गांधी की सहयता करने के लिए उन्हें राजनीति में उतारना पड़ा। वर्ष १९८४ के अक्टूबर माह में इंद्रा गांधी को टीवी के लिए एक इंटरव्यू देने था जैसे ही वे अपने कार्यालय से निकली उनके सुरक्षा कर्मियों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी।

गंभीर अवस्था मे उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया परंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका। उसी दिन शामको राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। जब उन्होंने शपथ ली तब वे विश्व के लोकतंत्र के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री थे और भारत के छटे प्राधानमंत्री बने।

उसी दिन राजीव गांधी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक संदेश दिया और उन्होंने कहा ” एक साथ मिलकर हमे ऐसा भारत बनना है जो इकीसवीं सदी का आधुनिक भारत बने। राजीव गांधी एक ऐसे प्रधानमंत्री रहे है जिन्होंने हर वर्ग के लोगों को अपनी उदारता,सरलता और प्रभावशाली व्यक्तित्व से प्राभावित किया है।

प्रधानमंत्री होने के बावजूद वे अपने पिताजी द्वारा दी हुई सीख अपना काम स्वयं करो नहीं भूले और सदा ही उस पर अमल करके आगे बढ़ते रहे। उन्हें पश्चयात शास्त्रीय संगीत का शौक भी था।

राजीव गांधी देश की युवा शक्ति को बढ़ावा देने में अग्रसर थे उनका मानना था कि देश का विकाश युवाओं द्वारा ही संभव है। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को भी एक नई दिशा दी। भारत मे कंप्यूटर जैसी तकनीकी को लाने में उनका काफी योगदान रहा है। ये ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के मिशाल माने जाते थे और इसलिए वे अत्यंत लोकप्रिय थे।

देश के लिए लिए जाननेवाले महत्वपूर्ण निर्णयों में वे हमेशा अपने पार्टी के सदस्यों का निर्णय और परामर्श लेते थे और उनका मत पूछते थे और उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचते थे। अपने कार्य कॉल में उन्होंने भारत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने हेतु अनेक कार्य किये। उन्होंने कई विदेश यात्राएं भी की और बाहरी देशों के साथ भारत के राजनीतिक संबंध भी स्थापित किये,उन्होंने और भी काजी बड़े फैसले लिए जिसमे श्रीलंका में शांति सेना भेजना,मिज़ोरम,असम एवं पंजाब समझौता भी शामिल हैं।

उन्होंने शीलश के शेयर में काफी विकाश करवाये और अठारह वर्ष से युवाओं को मत अधिकार भी दिया जिससे युवाओं को भी अपने प्रतिनिधि को चुनने का अवसर प्राप्त हो। २१ मई १९९१ को ग्रिससँ बम्ब विस्फोट में उनकी हत्या कर दी गयी। उनके निधन से भारत ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया और उस क्षति की पूर्ति कभी नहीं हो सकती। भारत उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता आज देश की जो उन्नति है तकनीकी के क्षेत्र में,भारत का जो पूरे विश्व मे नाम है वह राजीव गांधी जी की ही देन है।


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