मेरी रुचि पर निबंध – My Hobby Essay in Hindi

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सामान्य रूप से रुचि उसे कहते जो मनुष्य अपने खाली समय में करना पसंद करता है। वास्तव में एक व्यक्ति के अंदर रुचि का होना अत्यंत आवयशक है क्योंकि वह उसे जागरूक बनाती है,कार्यशील बनाती है। आमतौर पर विद्यालयों में लेखन प्रतियोगिता में बच्चों को अधिकांस मेरी रुचि के विषय पर ही निबंध लिखने को दिया जाता है और इन निबन्दों को पढ़कर सभी बच्चों की अलग -अलग रुचि का पता चलता है।

मेरी रुचि पर निबंध – Long and Short My Hobby Essay in Hindi

मेरी रुचि खाली समय में गाना सुनने की है। संगीत मुझे बहुत प्रिय है। इससे एक सकारात्मक ऊर्जा जागती है,दिन आंच बीतता है और मन शांत रहता है। जब कभी मुझे अत्यधिक चिंता घेर लेती है और उपाय मिलने में समय अधिक लगता है तब मैं एकांत बैठकर संगीत सुनती हूँ इससे चित्त को शांति मिलती है,और दिमाग ठंडा रहता है। इससे सोचने की क्षमता और अधिक बढ़ जाती है।

केवल चिंता में ही नही अपितु जब मैं बहुत थक जाती हूँ तब संगीत सुनकर मुझमे फिरसे उत्साह का संचार हो जाता है,फुर्ती आ जाती है,थकान दूर हो जाती है। वैसे तो संगीत अनेक प्रकार के होते है पर मुझे विशेष रूप से शांत और कोमल संगीत सुनना पसंद है। संगीत एक ऐसी मधुर ध्वनि है जो हमे प्रन्नचित कर हमारे भीतर नई उमंग भर्ती है। आज से नही कई वर्षों से लोग भपिरे विस्व में संगीत को बहुत महत्व देते है। भारतीय संगीत इतिहास पौराणिक कथाओं से संबंधित माना गया है।

मुग़ल,राजपूत,मराठा सब को संगीत से बहुत लगाव था,संगीत के लिए तो इनके भवन में विशेष रूप से एक कक्ष का निर्माण किया जाता था। आधुनिक संगीत प्राचीन संगीत से बहुत अलग है।

आजके गायक तेज़ व उचे स्वरों में गाते है और काफी लोगों को यह पसंद भी है क्योंकि वर्तमान की भाग दौड़ वाली ज़िन्दगी में किसी के पास शांत होकर कुछ पल ठहरने तक का वक़्त नही है,ये तेज़ गाने लोगों में फुर्ती और उत्सह का संचार करते है । आजकल के गाने यतार्थ स्तिथि का वर्णन करते है इसलिए युवा पीढ़ी को बहुत पसंद है।

सफर के समय संगीत का अपना अलग ही महत्व है,संगीत सुनते हुए सफर करने से चाहे कितनी भी लंबी दूरी क्यों न हो वक़्त का अंदाज़ा ही नही लगता और सफर सुगमता से पार हो जाता है। कई लोगों को सफर के दौरान संगीत सुनना बहुत पसंद है और उनमें से एक मैं भी हूँ।

संगीत मानव मन को सुख देता है,यह एक औषधि की भांति है क्योंकि इसे सुनकर मनुष्य अपनी चिंताओ से भले ही कुछ क्षण के लिए राहत का अनुभव करता है। ऐसा कहाँ जाता है कि पहले स्वर धरती पर नारद मुनि द्वारा लाया गया और वह स्वर ॐ था।


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