हैकिंग क्या होता है? और इसके प्रकार के बारे में पूरी जानकारी

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हैकिंग का मतलब होता है किसी कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क की कमजोरी का पता लगाना और उसका जोड़ अपने अक्ब्जे में कर लेना। इसको करने के लिए बहुत सारे मेथोड्स होते हैं, जिनके बारे में हम निचे विस्तार से बात करने वाले हैं।

हैकिंग  क्या होता है? (Hacking Kya Hai)

यह पासवर्डिं और कोडस् को क्रैक करके भी किया जाता है, जो आपको किसी सिस्टम में access देता है। इसका एक और सटीक डेफिनिशन ये भी है की हैकिंग की प्रक्रिया में हम किसी डिजिटल डिवाइस (जैसे कंप्यूटर, मोबाइल, टेबलेट आदि) या फिर नेटवर्क की access प्राप्त कर लेता है।जिससे वो घर बैठे ही वो उसे कंट्रोल कर सकता है।

अभी हम अपने laptop या कंप्यूटर में गेम खेल रहे हैं और हमें कुछ पता नही है।इसी दौरान हैकर हमारे कंप्यूटर के सारे फ़ाइल को चुरा सकता है और हमारे कंप्यूटर की डाटा को डेलेट भी कर सकता है।इसी को हम हैकिंग कहते हैं।

हैकिंग के प्रकार:

कंप्यूटर हैकिंग

इसके नाम से ही आपको पता चल रहा होगा की इस प्रकार के हैकिंग में किसी कंप्यूटर सिस्टम को अपने कब्जे में कर लेता है।इससे हैकर कहीं दूर से ही किसी कंप्यूटर में कोई भी काम कर सकता है।इसमें लिए हैकर को किसी तरह से विक्टिम में कंप्यूटर में virus या फिर मलवेयर को पहुँचाना होता है। ये मलवेयर कहीं भी छुपा हो सकता है। यहाँ तक ही कंप्यूटर में कोई आपको फोटो में भी मलवेयर डाल के भेज सकता है और वो आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे बचने के लिए कंप्यूटर में Anti-virus का इस्तेमाल किया जाता है।

नेटवर्क हैकिंग

इसके भी नाम से ही पता चल रहा होगा की इसमें हैकर किसी प्राइवेट नेटवर्क का access अपने कब्जे में कर लेता है. जैसे की कोई कंपनी है, जिसके ऑफिस में बहुत सारे कंप्यूटर एक साथ लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) माध्यम से जुड़े हुए हैं तो हैकर LAN में किसी प्रकार अनौठोरीझेड access प्राप्त कर लेता है. उसके बाद नेटवर्क से जुड़े हुए सारे कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकता है.

पासवर्ड हैकिंग

इस प्रकार के हैकिंग में कई सारे टूल्स की मदद से पासवर्ड को पता किया जाता है फिर आपके सिस्टम या फिर नेटवर्क को अपने कब्जे में किया जाता है.

एथिकल हैकिंग

इस प्रकार के हैकिंग में हैकर किसी सिस्टम या फिर नेटवर्क का unautherized access नही लेता है. बल्कि इसमें हैकर किसी सिस्टम या फिर नेटवर्क की कमजोरी का पता लगते हैं और फिर उन्हें ठीक करते है. इसका इस्तेमाल हर बड़े बड़े ऑनलाइन संस्थाओं द्वारा किया जाता है।

फिशिंग

ये वो फ़िशिंग नही होते हैं जिन्हें मछली को जाल में फसाया जाता है।बल्कि ये उसी से मिलता जुलता होता है।हैकर्स किसी की पर्सनल इंफोर्मेशन जैसे एकाउंट पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड डिटेल्स और भी कई तरह की जानकारी प्राकर करने के लिए फिजिनग मेथोड का इस्तेमाल करते हैं।

इस मेथोड में हैकर्स पहले किसी बड़े website जैसे facebook, gmail, etc के जैसा एक webpage बनाता है। ये दिखने में बिलकुल असली website के जैसा होता है लेकिन इसका URL बिलकुल वैसा नही होता है। इसका URL original website के बिलकुल सिमिलर ही होता है लेकिन वैसा नही होता है।इसके URL को किसी तरह विक्टिम के पास भेजा जाता है, और विक्टिम उसे असली website समझकर उसमे अपनी लॉजिन इंफोर्मेशन दे देते हैं।उसके बाद विक्टिम के निजी जानकारी हैकर्स के पास चला जाता है।इसलिए किसी भी site में लॉगिं या निजी जानकारी साझा करने से पहले उनके URL को अच्छी तरह से चेक कर लें.

Virus, ट्रोजन

यह किसी हैकर्स के द्वारा रिलीज़ किये जाते हैं. इसको बनाने के बाद किसी तरह विक्टिम के सिस्टम या नेटवर्क में इसको एंटर कर दिया जाता है. ये लोग किसी भी फाइल के अन्दर virus को छिपा देते हैं. जब भी हम इंटरनेट या कही से कोई जरुरी फाइल डाउनलोड करते है तो उसी के अन्दर भी ये छुपा हुआ हो सकता है।किसी सिस्टम में virus के प्रवेश होने के बाद हैकर्स उनपर अपना कब्ज़ा जमा लेते हैं फिर वो किसी भी फाइल को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

UI एड्रेस

इस मेथोड में हैकर्स एक फेकें उसर् इंटरफास् बनाते हैं और जब उसर् किसी विशेष website में जाने के इरादे से इसपर क्लिक करता है तो ये किसी दुसरे website में रेडिरेक्त हो जाता है. फिर user उसे असली site समझकर अपनी जाकारी दे देते हैं.

यह हैकिंग हमला उन website पर आसानी से किया जा सकता है जो SSL (HTTPS) का उपयोग नही करते हैं. इसलिए जब आप किसी वेबसाइट पर अपना लॉगिं इंफोर्मेशन या दूसरी निजी जानकारी देते करते हो तो चेक कर लें की उस website में HTTPS है. अगर नही हो तो ऐसे site में निजी जानकारी share करने से बचिए.

DNS स्पूफिंग

इसमें बसीकैलि किसी website या डोमैन् का कैचे डाटा use किया जाता है, जिन्हें user शायद भूल जाता है. इससे user किसी नये website पर भी विजित करता है तो उन्हें लगता है की वो इसपर पहले भी आ गया है. और इसी कारण वो यहाँ पर अपनी निजी जानकारी देते देते हैं.

कीलोग्गेर

कीलोग्गेर एक साधारण सा सॉफ्टवेयर होता है, जो की user के कीबोर्ड के लॉग फाइल पर अपनी नजर रखता है. इस लॉग फाइल में user ने जितने भी चीज अपने कीबोर्ड से टाइप किया होता है सारा डाटा होता है. इसमें किसी website में आप अपना नाम और पासवर्ड देकर लॉगिं करते हैं तो उसका भी डाटा इसमें स्टोर होकर रहता है.

इसके प्रोग्राम को हैकर्स लोग किसी भी डेविस जैसे कंप्यूटर, मोबाइल या कोई दुसरे हार्डवेयर देविसेस में इंस्टाल कर देता है. कीलोग्गेर ही एक सबसे बड़ा कारण है, जिससे आप यदि online बैंकिंग करते हैं तो वहां आपको webpage में ही कीबोर्ड मिलता है

बैट एंड स्विच

इस तरह के हैकिंग का शिकार आज के समय में ज्यादा तर लोग होते हैं. इसमें हैकर्स पहले अपना स्क्रिप्ट तैयार करता है फिर किसी थिर्ड पार्टी एवर्तिसिंग कंपनी में अपने site को एवर्तिसिंग करते है. एवर्तिसिंग बैनर में कुछ ऐसा लिख देते हैं जिससे कोई भी users उसपर आसानी से क्लिक कर देता है.


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