योग पर निबंध – Essay On Yoga in Hindi

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योग को अपनाने का करो विचार ,

हो जायेगा जीवन संचार ,

खुद के साथ साथ दुसरो का भी करो कल्याण ,

यही है आज का विचार

योग पर निबंध – Long and Short Essay On Yoga in Hindi

जी हां , यदि हम योग की अपने जीवन में जगह देंगे तो इससे न केवल हमारा कल्याण होगा बल्कि इस कारण हम दूसरो के जीवन को भी सुखद बना सकते है।  योग एक प्रकार की कला भी है और हमारा पारम्परिक चिक्तिसक ज्ञान भी।  पुरातन काल में हमारे पूर्वज इसी ज्ञान के द्वारा अनेक रोगो का उपचार करते थे।

योग शब्द का उद्भव

योग शब्द का उद्भव या निर्माण यूज शब्द से हुए है जिसका अर्थ है जुड़ना या तालमेल बिठाना। योग के द्वारा हम आत्मिक और शारारिक चिंतन में सम्बन्ध स्थापित करते है।  दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते है कि योग के द्वारा हम अपने शरीर और मस्तिष्क  में सम्बन्ध में एकाग्रता स्थापित करते है जिससे हमारा मन शांत महसूस करता है और चित का भी विकास होता है और साथ ही साथ हमारा  मन  तनावमुक्त होता है।

ऐसा माना जाता है हजारो साल पहले शिव जिन्हे आदि गुरु या प्रथम गुरु माना जाता है उन्होंने अपने ज्ञान को सप्त ऋषियों में दे दिया था।  इसका कारण यह था ज्ञान एक पूँजी है जिसे बाटने से वह बढ़ता है और इसे एक व्यक्ति के पास रहने से यह सिमित हो सकता है इसलिए देवो के देव आदि देव ने इस ज्ञान को ऋषिमुनिओ को वरदान सवरूप दे दिया ताकि आने वाली पीढ़ी का कल्याण हो सके।

योग दिवस

योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।  11 दिसंबर 2014 सयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है।  यह घोषणा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के द्वारा सयुंक्त राष्ट्र की महासभा में दिए गए भाषण के दौरान हुई।

योग का जीवन में स्थान

योग का हमारे जीवन में बहुत स्थान है।  योग से न केवल हमारा शारारिक विकास होता है बल्कि मानसिक विकास भी होता है।  योग का अभयास करने से हमें अनेक भयंकर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। आजकल की दिन प्रतिदिन की परेशानियों की वजह से मन अशांत हो जाता है जिसके कारण हमारा सामाजिक जीवन भी अस्त व्यस्त हो जाता है।  योग से न केवल हमारा मन शांत होगा बलिक वह हमारे समक्ष आने वाली  हर समयस्या का सामना करने के लिए प्रेरित करता है और हमने तन और मन को मजबूत करता है

योग के प्रकार (Types Of Yoga In Hindi)

योग के कई प्रकार है , यम , नियम,आसन,  प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान , समाधि। योग के ये आठ अंग है जिससे हमारा शारारिक और मानसिक विकास होता है।  योग क अंगो का वर्णन इस प्रकार है :-

  • यम :– यम का अर्थ है किसी से झूठ न बोलना , किसी को क्षतिग्रस्त न करना, किसी तर की हिंसा न करना।
  • नियम :- नियम का अर्थ पवित्र जीवन का पालन करना , मन को शांत रखना , आत्मा और परमात्मा में संपर्क स्थापित करके अध्यात्मक ज्ञान की अनुभूति करना
  • आसन:– आसान में बैठने वाले आसन आते है जिसके अन्तगर्त हम बैठ कर किये जाने वाले व्यायाम अथवा आसन करते है।
  • प्राणायाम :– प्राणायाम का अर्थ है अपनी साँसों को नियंत्रित करना।  इसके अंतर्गत हम अपने साँसों को नियंत्रित करके बाहर की और छोड़ते है।
  • धारणा :– धारणा का अर्थ है मन को किसी एक स्थान पर एकाग्र करना।  अथार्त अपने मन को किसी एक विषय या एक बिंदु पर केंद्रित करना।  जैसे मनोचिकसैक हमें किसी एक बिंदु पर अपना ध्यान लगाने को कहते है।
  • ध्यान :- ध्यान धारणा का ही एक रूप है , धारणा के अंतर्गत हम स्थूल वास्तु पर अपना धयान लगते है जबकि ध्यान क अंदर हम अपना ध्यान एक सूक्षम या अस्थूल वास्तु पर अपना ध्यान लगाते है।
  •  समाधि :– समाधि का अर्थ है इस स्थूल और नशवर जीवन से स्वयं को मुक्त करना और यह योग की चरम सीमा है जहा प्राणी स्वयं को इस स्थूल जीवन का अंग न समझकर अपनी ही दुनिया में रहता है।
  • प्रत्याहार :- इसके अंतर्गत विषय की बाह्यमुक्ता को त्यागकर अंतर्मुखता को अपनाना।

योग के लाभ

योग से हमें कई लाभ है जिससे हमारा आध्यात्मिक और शाररिक विकास होता है और इसके साथ साथ हमारा चित और मन दोनों शांत रहते है।

रोगो से मुक्ति

योग से हमें अनेक रोगो से मुक्ति मिलती  है जैसे :- अस्तमा , मधुमेह , हिर्दय समबन्धी बीमारियां , इत्यादि। यदि हम नियमित समय से लगातार  योग करते है तो हम अपनी इन्द्रियों को भी वश में कर सकते है। आजकल हर छोटे बड़े , जवान , बड़े सभी किसी न किसी रोग से पीड़ित है जिसका एकमात्र इलाज योग है।

आप किसी भी प्रकार की दवाईया या फ़ूड सप्लीमेंट खा ले वह कुछ समय तक ही हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करेंगे , पर यदि हम योग का अभ्यास करते है तो वो हमें जीवन भर शक्ति प्रदान करता है।  जैसे यदि हम पुराने ज़माने के लोगो को यदि आज की जनरेशन से तालमेल करे तो बहुत अंतर होगा इसका एक कारण यही है पुराने लोग रोज़ सुबह उठकर योगाभ्यास करते थे और खूब व्यायाम करते थे।

योग से होगा स्वस्थ जीवन का निर्माण

इसे अपनाया तो होगा  देश का कल्याण

आने जाने सब पीढ़ियों का होगा ये अभिमान

तभी विदेश भी करेगा मेरे देश का सम्म्मान

शारारिक विकास

योग के कारण हमारा शारारिक   होता है।  इसके द्वारा हमारा हमारे शरीर में लचीलापन आता है और साथ ही साथ हमें हमारे शरीर में रोगो से लड़ने की प्रतिरोध क्षमता को भी बढ़ाता है।  योग के कारण हमारा शरीर स्वस्थ व निरोगी काया बनता है तथा शरीर के अंगो का भी विकास होता है।

साँझ सवेरे करेंगे यदि योग

पास नहीं भटेगा कोई रोग

मानसिक विकास

योग से न केवल हमारा शारारिक विकास होता बल्कि हमारा मानसिक विकास भी होता है।  योग के कारण हमारा मन प्रसन रहता है और एकाग्र भी होता है।

योग से असुविधा

योग करने से यदि लाभ है तो उसके कई अलाभ भी है।  योग भली ही हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है पर इसके साथ साथ यदि हम यदि किसी भी आसान का देर तक प्रयास करते है तो यह हमारे लिए नुक्सान जनक होता है जैसे प्राणायाम काफी समय तक करने से हमारा शरीर कुंडली सिंड्रोम का शिकार हो जाता है और योग को ज्यादा समय तक करने से हमारे मांसपेशियों में खिचाव होता है जिसके कारण हमारा शरीर सुडौल बनने की बजाये और कमजोर हो जाता है।

इसके अतिरिक्त इससे न केवल हमारा शरीर न केवल क्षतिग्रस्त हटा है बल्कि कभी इसका अधिक अभ्यास करने से शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द मासूस होता है और यदि हम बिना दर्द को महसूस करे फिर भी अभ्यास में लगे रहते है तो हमारा शरीर लकवा का शिकार हो जाता है। यदि योग करने क बा आपको किसी भी तरह की थकावट मासूस होते है या चक्कर आते है तो हमें समझना होगा कि योग का अभ्यास हम ज्यादा कर रहे है।  ऐसी स्थिति में हमें यदि हमें चक्कर आये तो हमें खुली हवा में साँस लेना  चाहिये और पर्याप्त नींद और आराम करे।


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