बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध – Essay On Buddha Purnima In Hindi

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बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध – Short Essay On Buddha Purnima In Hindi

भारत एक ऐसा देश है जहां एक साथ कई धर्म के लोग खुशी-खुशी साथ रहते हैं और यही इस देश की खासियत है कि कई धर्मों के साथ होने के कारण या देश पूरे विश्व में शांति प्रिय देश के रूप में जानी जाती है, यह मंदिर, मस्जिद ,गुरुद्वारा इत्यादि एक साथ विराजमान है और इन सब धर्मों को मानने वाले आपस में बेहद भाईचारा के साथ रहते हैं ।

यह देश “विविधता में एकता “के लिए मशहूर है, और इस देश में ऐसे कई महान पुरुष है जिसने इस देश के नाम को पूरे विश्व में प्रख्यात किया है । जब किसी धर्म की बात की जाती है तो उस धर्म से जुड़े हुए कई महान लोगों का नाम लोग जरूर लेते हैं और जब भारत की बात हो तो धर्मों के महान लोग जन्म लिए हैं जैसे कि महाराणा प्रताप , टीपू सुल्तान , गौतम बुद्ध इत्यादि ।

इन महान पुरुषों ने भारत की धरती को गौरवान्वित किया और पूरे विश्व में भारत को मशहूर किया है । इन खास महान पुरुषों के लिए पूरा देश और पूरा विश्व आदर प्रकट करता है और इसीलिए इन लोगों के जन्मदिन को खास तरह से मनाया जाता हैं जन्मदिन किस स्तर पर मनाया जाएगा यह बात निर्भर करता है कि वह खास महान पुरुष किस स्तर तक विख्यात हुए।

भारत के महान बेटे कुछ देश में तो कुछ पूरे विश्व में अपनी अच्छाई और धर्म के कारण जाने जाते हैं और उन महान बेटों में से एक है आदरणीय गौतम बुद्ध । ऐसा युवक जो पूरे विश्व में शांति का पाठ पढ़ा कर लोगों के दिलों से लालच का मैल साफ करके जिंदगी को मोह के बंधन से आजाद करके उन्हें जीवन का सच्चा पाठ पढ़ाते और समझाते थे, गौतम बुद्ध केवल इंसान नहीं बल्कि त्याग और महानता के देवता हैं ।

गौतम बुध के महान जीवन कथा

भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में सिद्धार्थ गौतम के रूप में शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। वह एक वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति थे, जो शाक्य के राजकुमार थे। यह राज्य आज के आधुनिक भारत और नेपाल के किनारे एक छोटा सा क्षेत्र है। उन्होंने महज 16 वर्ष की आयु में एक खूबसूरत महिला से विवाह किया और उनका एक पुत्र था , ऐसे ही एक वक्त ऐसा आया जब गौतम बुद्ध की जिंदगी में एक बड़ा करवट लिया जब वह प्रथम बार अपने महल से बाहर निकले उन्होंने पूरी दुनिया को दुखी देखा और आपस में लोगों को लड़का देखकर उन्हें बेहद बुरा लगा । अपना वैवाहिक और गृहस्थ जिंदगी का त्याग किया, वह वर्षों तक कई स्थानों में घूमे और पच्चीस वर्ष की उम्र में वह बोध गया में पहुंचे, जहां वह एक पीपल पेड़ के नीचे बैठे थे। और अकेले ध्यान के चालीस दिनों के बाद उन्होंने निर्वाण, स्थायीता की स्थिति प्राप्त की।

बुद्ध पूर्णिमा –

बुद्ध पुर्णिमा पूरे बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार है, बुद्ध पूर्णिमा को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि बुद्ध जयंती और वेसाक और इस दिन को बुद्ध जन्मदिन भी कहा जाता है । यह वैसाखा में पूर्णिमा की रात (हिंदू कैलेंडर के अनुसार जो आम तौर पर अप्रैल या मई में पड़ता है) को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। यह केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में मनाया जाता है, जैसे कि थाईलैंड के विशाखा में , इंडोनेशिया, बुक इत्यादि । भगवान बुद्ध के जन्म तिथि को मई के दूसरे रविवार को ताइवान सरकार द्वारा घोषित की गई थी। यह त्योहार पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में मनाया जाता है, लेकिन इसे मनाने का तरीका देश से देश और क्षेत्र से क्षेत्र में भिन्न होता है।

भगवान बुद्ध के जन्म तिथि को मई के दूसरे रविवार को ताइवान सरकार द्वारा घोषित की गई थी। यह त्योहार पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में मनाया जाता है, लेकिन इसे मनाने का तरीका देश से देश और क्षेत्र से क्षेत्र में भिन्न होता है।

बुद्ध पुर्णिमा का मुख्य उत्सव बिहार के बोध गया में मनाया जाता है, जहां विश्व सेसंख्या में बौद्ध धर्म के लोग इकट्ठा होते हैं और भगवान बुद्ध की आराधना किया करते हैं । बौद्ध धर्म के लोगों के लिए, बोध गया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बोध गया श्राइन, बुद्ध की प्रबुद्धता की जगह को चिह्नित करती है।

बोध गया भारत में बिहार के गया जिले में एक छोटा सा शहर है। बौद्ध पूर्णिमा के दिन भक्त मंदिरों में दान करते हैं। इस खास दिन के दौरान बौद्ध धर्म के लोग रंगीन बौद्ध झंडे के साथ मंदिर और क्षेत्र को सजाने के अलावा, बौद्ध लोग रोशनी, मोमबत्तियां और दीयाओं के साथ अपने घर को सजाते हैं। इस खास दिन पर बौद्ध धर्म के लोग बहुत खास काम करते हैं जैसे कि, स्नान करने के बाद केवल सफेद कपड़ा पहनना और फिर सुबह की प्रार्थना के बाद, भिक्षुओं के रंगीन जुलूस, बड़े प्रसाद के साथ पूजा, मिठाई का वितरण होता है।

इस दिन आप बौद्ध धर्म के लोगों के घर, पठन मठों, धार्मिक हॉलों और घरों में बौद्ध ग्रंथों की प्रार्थना, उपदेश, गूंजते सुन सकते हैं। परंपरागत तौर पर बौद्ध धर्म के लोग शाकाहारी भोजन करते हैं इसीलिए बुद्ध पूर्णिमा के दिन खास तौर पर बौद्ध धर्म के लोग खीर बनाते हैं,भगवान बुद्ध के आगे फूल चढ़ाकर मोमबत्तियां जलाते हैं और दुनिया के हित के लिए प्रार्थना करते हैं।

भगवान बुद्ध की शिक्षाएं -:

भगवान बुद्ध हमेशा दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाया है और बौद्ध धर्म एक ऐसा धर्म है जो अपने शांति के लिए पूरे विश्व में मशहूर है । भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद दुनिया को कुछ शिक्षाएं दी जिस पर आज तक बौद्ध धर्म अमल कर रहा है, और बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर अपना धर्म परिवर्तन करते हैं और बौद्ध धर्म को अपनाते हैं । बुद्ध की शिक्षाएं पूरी तरह से मनुष्यों को दुख और जीवन के पीड़ा से मुक्त करने के लिए हैं। बौद्ध धर्म की प्राथमिक शिक्षाएं चार मुक्य सत्य, आठवें पथ और अवधारणाएं हैं। यह चार परम सत्य बौद्ध धर्म की नींव हैं।

चार परम सत्य – 

  • सभी मानव परिस्थितियों में पीड़ा होती है।
  • पीड़ा का कारण होता है।
  • वह कारण लालसा या इच्छा है।
  • पीड़ा के समापन के लिए एक ही रास्ता है।

आठ पथ-:

  • चौथा नोबल सत्य आठवां पथ है, या अभ्यास के आठ क्षेत्रों जो जीवन के सभी पहलुओं को छूते हैं।
  • सही विश्वास (सत्य में)
  • सही इरादा (बुराई के बजाय अच्छा करने में)
  • सही भाषण (असत्य, निंदा और शपथ ग्रहण से बचें)
  • सही व्यवहार (दोष पूर्ण व्यवहार से बचें)
  • सही आजीविका (कुछ व्यवसाय जैसे कसाई,         प्रचारक, अपमानित थे)
  • सही प्रयास (अच्छे की तरफ)
  • सही अनुष्ठान (सत्य का)
  • सही एकाग्रता (इन नियमों का पालन करने के परिणामस्वरूप)

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