Chandra Shekhar Azad Information, Quotes & Biography in Hindi

Chandra Shekhar Azad Information, Quotes & Biography in Hindi

चंद्रशेखर कट्टर सनातन धर्मी ब्राहाण परिवार में पैदा हुए थे । इनके पिता नेक और धर्मनिष्ठ थे और उनमें अपने पांडित्य का कोई अहंकार नहीं था । वे बहुत स्वाभिमानी और दयालु प्रवृति के थे । घोर गरीबी में उन्होंने दिन बितायें थे और इसी कारण चंद्रशेखर की अच्छी शिक्षा नहीं हो पाई, लेकिन पढ़ना – लिखना उन्होंने गाँव के ही एक बुजुर्ग श्री मनोहरलाल त्रिवेदी से सिख लिया था, जो उन्हें घर पर निशुल्क पढ़ाते थे ।

बचपन से ही Chandra Shekhar Azad में भारतमाता को स्वतंत्र कराने की भावना कूट – कूटकर भरी हुई थी । इसी कारण उन्होंने स्वयं अपना नाम आजाद रख लिया था । उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना ने उन्हें सदा के लिए क्रांति के पथ पर अग्रसर कर दिया । १३ अप्रैल, १९१९ को जलियांवाला बाग़ अमृतसर में जनरल डायर ने जो नरसंहार किया, उसके विरोध में तथा रौलट एक्ट के विरुद्ध जो जन – आंदोलन प्रारंभ हुआ था, वह दिन – प्रतिदिन और जोर पकड़ता जा रहा था ।

इसी आंदोलन के दौरान प्रिंस ऑफ़ वेल्स मुम्बई आए और वे जहाँ – जहाँ गए, वहां – वहां भारतीयों ने उनका बहिष्कार किया । जब राजकुमार बनारस पहुँचने वाले थे, उस समय वहां भी उनके बहिष्कार का जुलूस में युवा चंद्रशेखर अपने साथीयों के साथ शामिल थे । पुलिस वाले जुलूस को तितर – बितर करने के लिए लाठी घुमाते हुए आ रहे थे । यह देख Chandra Shekhar Azad के मित्रगण लाठी के प्रहार से बचने के लिए इधर – उधर फ़ैल गए । केवल चंद्रशेखर ही अपने स्थान पर निडर खड़े रहे ।

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इसी बीच कुछ आंदोलनकर्ता, जो एक विदेशी कपड़ें की दुकान पर धरना दे रहे थे, उन पर पुलिस का एक दारोगा डंडे बरसाने लगा । यह अत्याचार Chandra Shekhar Azad से देखा नहीं गया और उन्होंने पास पड़ा एक पत्थर उठाकर उस दारोगा के माथे पर दे मारा । निशान अचूक था । दारोगा घायल होकर वहीँ जमीन पर गिर गया, लेकिन चंद्रशेखर को ऐसा करते हुए एक सिपाही ने देख लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस गिरफ्तारी से चंद्रशेखर जरा भी भयभीत या विचलित नहीं हुए । उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस वालोँ ने उनके कमरे की तलाशी ली तो उनके कमरे में लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय, महात्मा गांधी समेत अनेक राष्ट्रीय नेताओँ के चित्र मिले, जिसके आधार पर पुलिस वालोँ ने उन पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगा दिया ।

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इसके बाद उन्हें थाने में ले जाकर हवालात में बंद कर दिया गया । दिसंबर की कड़ाके वाली ठंड की रात थी और ऐसे में Chandra Shekhar Azad को ओढ़ने – बिछाने के लिए कोई बिस्तर नहीं दिया गया क्योंकि पुलिस वालोँ का ऐसा सोचना था कि यह लड़का ठंड से घबरा जाएगा और माफी माँग लेगा, किंतु ऐसा नहीं हुआ । यह देखने के लिए लड़का क्या कर रहा है और शायद वह ठंड से ठिठुर रहा होगा, आधी रात को इंसपेक्टर ने चंद्रशेखर की कोठरी का ताला खोला तो वह यह देखकर आश्चर्यचकित हो गया कि चंद्रशेखर दंड – बैठक लगा रहे थे और उस कड़कड़ाती ठंड में भी पसीने से नहा रहे थे ।

दूसरे दिन Chandra Shekhar Azad को न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया । उन दिनों बनारस में एक बहुत कठोर मजिस्ट्रेट नियुक्त था । उसी अंग्रेज मजिस्ट्रेट के सामने १५ वर्षीय चंद्रशेखर को पुलिस ने पेश किया ।

मजिस्ट्रेट ने बालक से पूछाः “तुम्हारा नाम ?” बालक ने निर्भयता से उत्तर दिया – “Azad” । “पिता का नाम ?” – मजिस्ट्रेट ने कड़े स्वर में पूछाः । ऊँची गरदन किए हुए बालक ने तुरंत उत्तर दिया – “स्वाधीन” । युवक की हेकड़ी देखकर न्यायाधीश क्रोध से भर उठा । उसने फिर पूछाः – “तुम्हारा घर कहाँ है ?” चंद्रशेखर ने गर्व से उत्तर दिया – “जेल की कोठरी” । न्यायाधीश ने क्रोध में चंद्रशेखर को १५ बेंत (कोड़े) लगाने की सजा दी ।

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बेंत (कोड़े) लगाने के लिए चंद्रशेखर को जेलखाने में ले जाया गया । बनारस का जेलर बड़े ही क्रूर स्वभाव का व्यक्ति था । कैदियों को सजा देने में उसे बड़ा आनंद आता था । इसलिए बेंत (कोड़े) लगवाने का कार्य उसे ही सौंपा गया । कोड़े लगवाने के लिए उसने Chandra Shekhar Azad को एक तख्ते से बंधवा दिया । इस समय उनके शरीर पर एक लंगोट के सिवाय अन्य कोई वस्त्र नहीं था । बेंत (कोड़े) लगाने वाले जल्लाद को कोड़े लगाने का आदेश दिया और फिर चंद्रशेखर पर तडातड़ बेंत (कोड़े) पड़ने लगे ।

लेकिन चंद्रशेखर भी अपनी हिम्मत के पक्के थे । उनकी हिम्मत व सहनशीलता ने बनारस के उस निर्दयी जेलर को भी हिला दिया । शरीर पर जबरदस्त पड़ने वाली बेंतों (कोड़े) की मार भी चंद्रशेखर के होंठों की मुस्कराहट और चेहरे पर चमचमाते देशभक्ति के तेज को न छीन सकी । हर बेंत (कोड़े) पर वह ‘भारतमाता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ का नारा लगाते रहे । यह सब देखकर वह जेलर झुंझला उठा और बोला – “किस मिट्टी का बना है यह लड़का ?” पास खड़े जेल के अन्य अफसर और उपस्थित लोग भी चंद्रशेखर की इस सहनशक्ति को बहुत आश्चर्य के साथ देखते रहे ।

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१५ बेंतों ( कोड़े ) की सजा के पश्चात, जेल के नियमानुसार तीन आने पैसे, जेलर ने चंद्रशेखर को दिए, लेकिन Chandra Shekhar Azad ने वह पैसे लेकर जेलर के मुँह पर ही फेंक दिए । घावों पर जेल के डोक्टर ने दवा लगा दी, फिर भी खून बहना बंद नहीं हुआ । वह किसी तरह पैदल ही घिसटते हुए जेल से बाहर निकले, लेकिन अब तक चंद्रशेखर की वीरता की कहानी बनारस के घर – घर में पहुँच गयी थी और जेल के दरवाजे पर शहर की जनता फूल – मालाएँ लेकर उनका स्वागत करने के लिए पहुँच चुकी थी । सबने मालाएँ पहनाकर उनका स्वागत किया और उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया । इसके साथ ही इन नारों से आकाश गूंज उठा – ‘चंद्रशेखर आजाद की जय, भारतमाता की जय’ ।

इस तरह १५ बेंतों (कोड़े) की सजा ने किशोर अवस्था में ही Chandra Shekhar Azad को एक लोकप्रिय नेता के रूप में प्रसिद्ध कर दिया । चंद्रशेखर को मिलने वाली सजा दर्दनाक व क्रूर अवश्य थी, लेकिन इस घटना के बाद उनकी भारतमाता के प्रति श्रद्धा और बलवती हुई, क्रांति की चिनगारियाँ उनके मन में धीरे – धीरे आग के रूप में परिवर्तित होने लगीं । आजादी का परवान उनके सिर पर चढ़ गया और अब उनके जीवन में केवल एक ही संकल्प शेष रह गया और वह था – देश जो अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराना ।

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पंद्रह वर्ष की उम्र में घटी यह घटना उनके जीवन का वह महत्वपूर्ण अध्याय थी जिसके कारण वह चंद्रशेखर तिवारी से चंद्रशेखर आजाद बने और क्रांतिकारीयों की श्रेणियों में गिने जाने लगे । कम उम्र में ही Chandra Shekhar Azad अनेकानेक युवाओं तथा भगत सिंह, सुखदेव जैसे क्रांतिकारीयों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने और अपने जीवन की आहुति देकर देश की स्वाधीनता का संकल्प पूर्ण कर गए ।

हम Aasaan Hai की और से भारत के इस महान क्रांतिवीर Chandra Shekhar Azad को सत सत नमन करते है ।
Chandra Shekhar Azad अमर रहो.

Chandra Shekhar Azad Quotes in Hindi

  • चिंगारी आजादी की सुलगती मेरे जश्न में है। इंकलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में है। मौत जहां जन्नत हो यह बात मेरे वतन में है। कुर्बानी का जज्बा जिंदा मेरे कफन में है।
  • शहीदों की चिताओं पर पड़ेंगे खाक के ढेले वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा
  • दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद रहेंगे
  • दूसरों को अपने आप से आगे बढ़ते हुए न देखो। हर दिन अपने आप के कीर्तिमान को तोड़ो, क्योकि सफलता आपकी अपनी खुद की लड़ाई है
  • मेरा नाम आजाद, मेरे पिता का नाम स्वाधीनता, और मेरा घर जेल है
  • अगर आपके लहू में रोष नहीं है, तो ये पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है। ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वो मातृभूमि के काम ना आए
  • यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता है, तो उसका जीवन व्यर्थ है
  • अभी भी जिसका खून ना खौला, वो खून नहीं पानी है; जो देश के काम ना आए, वो बेकार जवानी है
  • मात्रभूमि की इस दुर्दशा को देखकर अभी तक यदि आपका रक्त क्रोध नहीं करता है, तो यह आपकी रगों में बहता खून नहीं है ये तो पानी है
  • ऐसी जवानी किसी काम की नहीं, जो अपनी मातृभूमि के काम ना आ सके
  • दूसरों को खुद से आगे बढ़ते हुए मत देखो। प्रतिदिन अपने खुद के कीर्तिमान तोड़ो, क्योंकि सफलता आपकी अपने आप से एक लड़ाई है
  • यदि खून में रोष नहीं है, तो वह पानी के समान है जो फिर पानी मे रंग मिलकर बह रहा है
  • मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता समानता और भाईचारा सिखाता है
  • एक विमान जब तक जमीन पर है वह सुरक्षित रहेगा, लेकिन विमान जमीन पर रखने के लिए नहीं बनाया जाता, बल्कि ये हमेशा महान ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए जीवन में कुछ सार्थक जोखिम लेने बनाया जाता है
  • टूटी हुई बोतल है, टूटा हुआ पैमाना सरकार तुझे दिखा देंगे, ठाठ फकीराना
  • भले ही मेरा प्रारम्भिक जीवन आदिवासी इलाके में बीता है, लेकिन मेरे दिल में मातृभूमि ही बसती है
  • आप हर दिन दूसरों, को अपने रिकॉर्ड तोड़ने का प्रतीक्षा मत करो। बल्कि खुद उसे तोड़ने का प्रयत्न करो क्योंकि सफलता के लिए आपकी खुद से लड़ाई है

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