ब्लूटूथ (Bluetooth) क्या है? इतिहास, संस्थापक और फुल फॉर्म पूरी जानकारी

ब्लूटूथ क्या है? (Bluetooth Kya Hai)

ब्लूटूथ क्या है-वर्तमान युग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को आपस में एक दूसरे के साथ जोड़ने या तकनीकी भाषा में कहे तो आपस में एक दूसरे के साथ कनेक्ट करने के लिए कई माध्यमों का प्रयोग किया जाता है,उन्ही में से एक माध्यम है ब्लूटूथ।ब्लूटूथ के बारे में कौन नही जानता है यह तो एक ऐसा तकनीकी फीचर है जो लगभग हर मोबाइल फ़ोन में पाया जाता है ।

डेटा को ट्रांसफर करने का यह एक बहुत सरल तरीका है ।आज के समय में शेयर इट ,सेंडर आदि के आ जाने की वजह से ब्लूटूथ का महत्व थोड़ा कम हो गया है परंतु फिर भी यह अपना अस्तित्व पूर्ण रूप से बनाये हुए है।चाहे कोई भी डिवाइस क्यों न हो हर किसी को डेटा ट्रांसफर करने की जरूरत होती है,तब कहीं न कहीं ब्लूटूथ सबसे अधिक सुविधाजनक होता है।

ब्लूटूथ का फुल फॉर्म-

ब्लूटूथ शब्द का फुल फॉर्म दसवीं सदी के डेनमार्क और नॉर्वे के राजा हेरोल्ड ब्लूटूथ से पड़ा है।निहितार्थ यह है कि ब्लूटूथ संचार प्रोटोकॉल के साथ एक ही करता है,उन्हें एक सार्वभौमिक मानक में एकजुट करता है।डेनमार्क के राजा हेरोल्ड के कामों से प्रभावित होकर ब्लुटूथ का नाम रखा गया।

राजा ब्लूटूथ ने अपनी हिम्मत तथा काबिलियत से स्कंदनेविया के कई हिस्सों को जोड़ने का कार्य किया इसी से प्रभावित होकर बहुत सारे गैजेट्स को आपस में जोड़कर डेटा के आदान प्रदान करने वाले इस कांसेप्ट का नाम ब्लूटूथ रखा।

ब्लूटूथ का इतिहास-

ब्लूटूथ का आविष्कार सं 1914 में एरिक्सन कंपनी में रेडियो सिस्टम पर काम करने के लिए जाप हार्टसन ने किया था।इसके बाद कुछ कंपनियों ने मिलकर एसाईजी का गठन किया इसमे मुख्य रूप से जो कंपनियाँ शामिल थी वह है-नोकिया, सोनी एरिक्सन,इंटेल,आईबीएम,तोशिबा।

ब्लूटूथ का हिंदी में अर्थ-ब्लूटूथ को सामान्य रूप से डेटा आदान प्रदान करने का डिवाइस कहा जाता है।इसे हिंदी में डेटा सम्प्रेषण प्रणाली भी कहते हैं।आजकल प्रत्येक मोबाइल एवं लैपटॉप में ब्लूटूथ प्रणाली उपलब्ध होती हैं।

ब्लूटूथ कैसे बनाते है-

ब्लूटूथ एक वायरलेस या बेतार टेक्नोलॉजी है।यदि दो या और अधिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एक दूसरे से बहुत कम दूरी पर हो तो इनके बीच में वौइस् और डेटा का आदान प्रदान के लिये ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।इसका प्रयोग हम इस प्रकार कर सकते है जैसे गाड़ी चलाते वक्त कोई भी फ़ोन कॉल करने के लिए हैंड फ्री ब्लूटूथ इयरपीस को फ़ोन से जोड़कर,अपने आफिस में बहुत सारे तारों के प्रयोग से बचने के लिए अपने प्रिंटर को कंप्यूटर से जोड़कर।

ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी का उपयोग करने के लिए इसे अपने वायरलेस डिवाइस से जोड़ना होता है और इसी प्रक्रिया को पेयरिंग कहते है।पेयरिंग करने के लिए ब्लूटूथ के साथ दिए गये नियमों का पालन करना होता है।डिवाइस को जोड़ते वक़्त ,संपर्क जुड़ने से पहले आप से एक पिन नंबर पूछा जाता है।

आमतौर पर पैरिंग एक बार ही करनी पड़ती है।जब तक ब्लूटूथ आपके डिवाइस पर एक्टिवेट रहेगा तब तक भविष्य में भी यह संपर्क स्वयंस्थापित हो जाएगा।

ब्लूटूथ के लिए हिंदी शब्द-ब्लूटूथ को हिंदी में डेटा सम्प्रेषण प्रणाली कहते है।सामान्य रूप से इसके लिए प्रयुक्त होने वाला कोई एक विशिष्ट हिंदी शब्द नही है।

ब्लूटूथ के संस्थापक-

ब्लूटूथ के संस्थापक दसवी सदी के डेनमार्क के राजा हेरोल्ड ब्लूटूथ है।इन्होंने अपने प्रतिभा से स्कंदनेविया के कई हिस्सों को आपस में जोड़ा और इसी से प्रभावित होकर सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को एक साथ जोड़ने का कार्य आरंभ हुआ और ब्लुटूथ की स्थापना की गई।इसकी खोज 1994 में दूरसंचार के विक्रेता एरिक्सन द्वारा की गई थी।यह एक वायरलेस संचार का प्रोटोकॉल है।

ब्लूटूथ की पूरी जानकारी-ब्लूटूथ बेतार संचार के लिए एक प्रोटोकॉल है।मोबाइल,फ़ोन,लैपटॉप,संगणक,प्रिंटर,अंकीय कैमरा और वीडियो गेम जैसे उपकरण इसके माध्यम से एक दूसरे के साथ जुड़कर जानकारी प्रदान कर सकते है।

ब्लूटूथ को अपेक्षाकृत कम दूरी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।इसके लिए कई मानक है।आँकडे प्रसार दरे बदलती रहती है।ब्लूटूथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक बेतार,सस्ती,स्वचालित टेक्नोलॉजी है।यह मूलरूप से एक नेटवर्किंग मानक है जो दो स्तरों में काम करता है-

  • प्रथम स्तर में यह भौतिक आधार पर रज़ामंदी प्रदान करता है,
  • द्वितीय स्तर में यह प्रोटोकॉल के आधार पर रज़ामंदी प्रदान करता है।

ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी में ऊर्जा की खपत काफी कम है।यह प्रेषिय या ट्रांसमीटर की ऊर्जा आवश्यकता अनुसार कम कर देती है।
अतः मुख्य रूप से हम यह देख सकते है कि आधुनिक युग में सम्पूर्ण विश्व तकनीकी के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ चुका है और इसी में ब्लूटूथ ने अपना पूर्ण रूप से योगदान दिया है और हमारे रोज़मर्रा के जीवन को सफल बनाया हैं।