Ahmad Faraz Shayari, Ghazals, Sher & Quotes in Hindi

Ahmad Faraz Shayari, Ghazals, Sher & Quotes in Hindi

Ahmad Faraz Ghazals in Hindi

  • अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर
    चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए
  • अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है
    मगर चराग़ ने लौ को संभाल रक्खा है
  • अब उसे लोग समझते हैं गिरफ़्तार मिरा
    सख़्त नादिम है मुझे दाम में लाने वाला
  • अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम
    ये भी बहुत है तुझ को अगर भूल जाएँ हम
  • अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
    जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
  • अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
    आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ
  • अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें
    ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ
  • अब तिरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं
    कितनी रग़बत थी तिरे नाम से पहले पहले
  • अब तिरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए
    और से और हुए दर्द के उनवाँ जानाँ
  • अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख़्म खाइए
    ता-ज़िंदगी ये दिल न कोई आरज़ू करे
  • अब दिल की तमन्ना है तो ऐ काश यही हो
    आँसू की जगह आँख से हसरत निकल आए
  • अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
    ‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं
  • अभी तो जाग रहे हैं चराग़ राहों के
    अभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो
  • आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
    वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
  • आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
    जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
  • आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर
    क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें
  • आशिक़ी में ‘मीर’ जैसे ख़्वाब मत देखा करो
    बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
  • इक तो हम को अदब आदाब ने प्यासा रक्खा
    उस पे महफ़िल में सुराही ने भी गर्दिश नहीं की
  • इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
    ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँ नहीं देते
  • इस अहद-ए-ज़ुल्म में मैं भी शरीक हूँ जैसे
    मिरा सुकूत मुझे सख़्त मुजरिमाना लगा
  • इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
    आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की
  • इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब
    इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम
  • इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
    क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
  • इस से बढ़ कर कोई इनआम-ए-हुनर क्या है ‘फ़राज़’
    अपने ही अहद में एक शख़्स फ़साना बन जाए
  • उजाड़ घर में ये ख़ुशबू कहाँ से आई है
    कोई तो है दर-ओ-दीवार के अलावा भी
  • उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
    ऐ मिरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
  • उस का क्या है तुम न सही तो चाहने वाले और बहुत
    तर्क-ए-मोहब्बत करने वालो तुम तन्हा रह जाओगे
  • उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
    अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
  • ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते
    जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते
  • ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि ‘फ़राज़’
    रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़
  • कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे
    तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा
  • कुछ मुश्किलें ऐसी हैं कि आसाँ नहीं होतीं
    कुछ ऐसे मुअम्मे हैं कभी हल नहीं होते
  • कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
    बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो
  • कभी ‘फ़राज़’ से आ कर मिलो जो वक़्त मिले
    ये शख़्स ख़ूब है अशआर के अलावा भी
  • क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से
    वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला
  • क़ुर्बतें लाख ख़ूब-सूरत हों
    दूरियों में भी दिलकशी है अभी
  • क़ासिदा हम फ़क़ीर लोगों का
    इक ठिकाना नहीं कि तुझ से कहें
  • कितने नादाँ हैं तिरे भूलने वाले कि तुझे
    याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे
  • कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
    फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
  • किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
    तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
  • किस को बिकना था मगर ख़ुश हैं कि इस हीले से
    हो गईं अपने ख़रीदार से बातें क्या क्या
  • किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी
    बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए
  • किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
    कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
  • किसी दुश्मन का कोई तीर न पहुँचा मुझ तक
    देखना अब के मिरा दोस्त कमाँ खेंचता है
  • किसी बेवफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ ‘फ़राज़’ कब तक
    जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ
  • कौन ताक़ों पे रहा कौन सर-ए-राहगुज़र
    शहर के सारे चराग़ों को हवा जानती है
  • गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा
    मुद्दतों के बाद कोई हम-सफ़र अच्छा लगा
  • ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
    नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
  • चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो ‘फ़राज़’
    दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे

Ahmad Faraz Shayari, Quotes & Ghazals in Hindi

  • Ranjish hi sahi dil hi dukhane ke liye aa (अहमद फ़राज़ – रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ)
  • Ab ke hum bichde to shaayad kabhi khwaabon mein mile (अहमद फ़राज़ – अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें)
  • Is se pahle ki bewafa ho jaayen (अहमद फ़राज़ – इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ)
  • Faraz ab koi sauda koi junoon nahin (अहमद फ़राज़ – फ़राज़ अब कोई सौदा कोई जूनून भी नहीं)
  • Teri baatein hi sunane aaye ( अहमद फ़राज़ – तेरी बातें ही सुनाने आये)
  • Tum bhi khafa ho log bhi barham hain dosto (अहमद फ़राज़ – तुम भी ख़फ़ा हो लोग भी बेरहम हैं दोस्तो)
  • Tadap uthun to zalim teri duhai na doon (अहमद फ़राज़ – तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ)
  • Ahmad Faraz -Ab wo manzar, na wo chehre hi nazar aate hain ( अहमद फ़राज़ – अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नजर आते हैं)
  • Aaj fir dil ne kaha aao bhula dein yaadein (अहमद फ़राज़ – आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें)
  • Badan mein aag si chehra gulaab jaisa hai (अहमद फ़राज़ – बदन में आग सी चेहरा गुलाब जैसा है)
  • Ajab junoon-e-musaafat mein ghar se nikala tha (अहमद फ़राज़ – अजब जूनून-ए-मुसाफ़त में घर से निकला था)
  • Achha tha agar zakhm na bharte koi din aur (अहमद फ़राज़ – अच्छा था अगर ज़ख्म न भरते कोई दिन और)
  • Silsile tod gaya woh sabhi jaate jaate (अहमद फ़राज़ – सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते)
  • Rog aise bhi gham-e-yaar se lag jaate hain (अहमद फ़राज़ – रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं)
  • Bujhi nazar to karishme bhi rozo shab ke gaye (अहमद फ़राज़ – बुझी नज़र तो करिश्मे भी रोज़ो शब के गये)
  • Agarche zor hawaaon ne daal rakha hai (अहमद फ़राज़ – अगरचे ज़ोर हवाओं नें डाल रखा है)
  • Jab tera dard mere saath wafa karta hai (अहमद फ़राज़ – जब तेरा दर्द मेरे साथ वफ़ा करता है)
  • Ahamad Faraz – Jo bhi dukh yaad na tha yaad aaya (अहमद फ़राज़ – जो भी दुख याद न था याद आया)
  • Zindagi se yahi gila hai mujhe (अहमद फ़राज़ – ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे)
  • Kyun tabiat kahin thaharti nahin (अहमद फ़राज़ – क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं)
  • Tujh par bhi na ho gumaan mera (अहमद फ़राज़ – तुझ पर भी न हो गुमान मेरा)
  • Kuchh na kisi se bolenge (अहमद फ़राज़ – कुछ न किसी से बोलेंगे)
  • Har tamashai faqat sahil se manzar dekhta (अहमद फ़राज़ – हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता )
  • Kabhi mom ban ke pighal gaya kabhi girte girte sambhal gaya (अहमद फ़राज़ – कभी मोम बन के पिघल गया कभी गिरते गिरते सँभल गया)
  • Aankh se door na ho dil se utar jayega (अहमद फ़राज़ – आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा)
  • Khwaab marte nahin (अहमद फ़राज़ – ख़्वाब मरते नहीं)
  • Karun na yad agar kis tarah bhulaaun use (अहमद फ़राज़ – करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे)
  • Suna hai log use aankh bhar ke dekhte hain (अहमद फ़राज़ – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं)
  • Tu paas bhi ho to dil beqarar apna hai (अहमद फ़राज़ – तू पास भी हो तो दिल बेक़रार अपना है)
  • Phir usi rahguzar par shayad (अहमद फ़राज़ – फिर उसी रहगुज़र पर शायद)
  • Ab ke tajdeed-e-wafa ka nahi imkaan janaan (अहमद फ़राज़ – अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानां)
  • Usne sukoot-e-shab mein bhi apna payaam rakh diya (अहमद फ़राज़ – उसने सुकूत-ए-शब् में भी अपना पयाम रख दिया)
  • Kitaabon mein mere fasaane dhoondte hain (अहमद फ़राज़ – किताबों में मेरे फ़साने ढूंढते हैं)
  • Aise chup hai ki ye manzil bhi kadi ho jaise (अहमद फ़राज़ – ऐसे चुप हैं कि ये मंज़िल भी कड़ी हो जैसे)
  • Tujhse milne ko kabhi hum jo machal jaate hain (अहमद फ़राज़ – तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते हैं)
  • Aashiqi mein Meer jaise khwaab mat dekha karo (अहमद फ़राज़ – आशिकी में “मीर” जैसे ख्वाब मत देखा करो)
  • Usko juda hue bhi zamana bahut hua (अहमद फ़राज़ – उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ)
  • Qurbat bhi nahi dil se utar bhi nahi jata (अहमद फ़राज़ – कुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता)
  • Dost bankar bhi nahi saath nibhane wala (अहमद फ़राज़ – दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभानेवाला)
  • Jaana dil ka shehar, nagar afsos ka hai (अहमद फ़राज़ – जानाँ दिल का शहर, नगर अफ़सोस का है)
  • Haath uthaye hain magar lab pe dua koi nahi (अहमद फ़राज़ – हाथ उठाए हैं मगर लब पे दुआ कोई नहीं)
  • Kis ko gumaan hai abke mere saath tum bhi the (अहमद फ़राज़ – किस को गुमाँ है अब के मेरे साथ तुम भी थे)
  • Jab Kabhi chahe andheron mein ujale usne (अहमद फराज़ – जब कभी चाहे अंधेरों में उजाले उसने)
  • Dil behalta hai kahan anjum-o-mehtab se bhi (अहमद फ़राज़ – दिल बहलता है कहाँ अंजुमो-महताब से भी)
  • Dil ko ab yoon teri har ek ada lagti hai (अहमद फ़राज़ – दिल को अब यूँ तेरी हर एक अदा लगती है)
  • Qurbaton mein bhi judaai ke zamaane maange (अहमद फ़राज़ – क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे)
  • Juz tere koi bhi din raat na jane mere (अहमद फ़राज़ – जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे)
  • Khamosh ho kyon, daad-e-jafa kyon nahi dete (अहमद फ़राज़ – खामोश हो क्यों, दादे-जफा क्यों नहीं देते)
  • Har ek baat na kyon zehar si humari lage (अहमद फ़राज़ – हर एक बात न क्यों ज़हर सी हमारी लगे)
  • Zakhm ko phool to sar sar ko saba kahte hain (अहमद फ़राज़ – जख्म को फूल तो सर-सर को सबा कहते है)
  • Payaam aaye hain us yaar-e-bewafa ke mujhe (अहमद फ़राज़ – पयाम आए हैं उस यार-ए-बेवफा के मुझे)
  • Main to maqtal mein bhi kismat ka Skiandar nikala (अहमद फ़राज़ – मैं तो मकतल में भी किस्मत का सिकंदर निकला)
  • Kya rukhsat-e-yaar ki ghari thi (अहमद फ़राज़ – क्या रुख्सत-ए-यार की घड़ी थी)
  • Khusboo ka safar (अहमद फ़राज़ – ख़ुशबू का सफ़र)
  • Jab teri yaad ke jugnu chamke (अहमद फ़राज़ – जब तेरी याद के जुगनू चमके)
  • Jo chal sako to koi aisi chaal chal jana (अहमद फ़राज़ – जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना)
  • Tu ki anjaan hai is shehar ke aadaab samajh (अहमद फ़राज़ – तू कि अन्जान है इस शहर के आदाब समझ)
  • Roz ki musafat se choor ho gaye dariya (अहमद फ़राज़ – रोज़ की मुसाफ़त से चूर हो गये दरिया)
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