बच्चों के लिए दिवाली पर निबंध – दीपावली का महत्व और उत्सव

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Diwali Essay in Hindi for Child: जानिए बच्चों के लिए दिवाली पर सुंदर और सरल निबंध। इस निबंध में दीपावली का महत्व, इतिहास, और इसे मनाने की परंपराएँ विस्तार से दी गई हैं।

भूमिका

दिवाली या दीपावली भारत का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है। यह प्रकाश और खुशियों का पर्व है, जिसे पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बच्चों के लिए यह त्योहार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होता है क्योंकि इस दिन दीप जलाए जाते हैं, मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और आतिशबाजी की जाती है। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दिवाली का इतिहास

दिवाली का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसे मनाने के पीछे विभिन्न कथाएँ और मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं। हिंदू धर्म में, दिवाली का संबंध भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी से जोड़ा जाता है। जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया।

इसके अलावा, जैन धर्म में, दिवाली का महत्व भगवान महावीर के निर्वाण दिवस से जुड़ा हुआ है। इसी दिन उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया था। वहीं, सिख धर्म में, दिवाली का संबंध गुरु हरगोबिंद जी की जेल से रिहाई से भी है।

दिवाली का धार्मिक महत्व

दिवाली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो धन और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन को नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मानता है और अपने बही-खाते का शुभारंभ करता है।

भगवान गणेश की पूजा भी इस अवसर पर की जाती है, क्योंकि वे बुद्धि और सफलता के देवता माने जाते हैं। कार्तिक माह की अमावस्या को होने वाली यह पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है।

दिवाली कैसे मनाई जाती है?

दिवाली का त्योहार पाँच दिनों तक चलता है, जिनमें प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है।

  1. धनतेरस – यह दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन लोग नए बर्तन, आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएँ खरीदते हैं, क्योंकि इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

  2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) – इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था, जिससे लोगों को अत्याचार से मुक्ति मिली। इसे रूप चौदस भी कहा जाता है।

  3. दिवाली (मुख्य पर्व) – इस दिन माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। घरों में दीप जलाए जाते हैं, पटाखे छोड़े जाते हैं, और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं।

  4. गोवर्धन पूजा – इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण किया जाता है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है।

  5. भाई दूज – इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व होता है।

दिवाली पर विशेष तैयारियाँ

दिवाली की तैयारियाँ कई सप्ताह पहले से शुरू हो जाती हैं। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, पेंट करवाते हैं, और सुंदर सजावट करते हैं। बाजारों में रौनक होती है, और दुकानों में तरह-तरह की वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं। महिलाएँ तरह-तरह की मिठाइयाँ और पकवान बनाती हैं।

रंगोली बनाना भी दिवाली की परंपराओं में शामिल है। यह रंगों और फूलों से बनाई जाती है, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

दिवाली का सामाजिक महत्व

दिवाली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों को एकजुट करता है और आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देता है। दिवाली पर लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों से मिलते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं, और मिलकर त्योहार का आनंद लेते हैं।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता

आजकल पटाखों के कारण प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण को हानि पहुँचती है। इसलिए हमें दिवाली को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए।

  1. कम पटाखे जलाएँ – वायु और ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए हमें पटाखों का कम से कम उपयोग करना चाहिए।

  2. मिट्टी के दीप जलाएँ – विद्युत बल्बों के स्थान पर मिट्टी के दीये जलाना अधिक पर्यावरण-स्नेही होता है।

  3. जैविक रंगों से रंगोली बनाएँ – रासायनिक रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें।

  4. अनावश्यक बिजली खर्च न करें – बिजली की खपत कम करने के लिए एलईडी लाइटों का प्रयोग करें।

दिवाली पर निबंध – निष्कर्ष

दिवाली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अच्छाई की बुराई पर जीत, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। यह हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम और सद्भाव से रहने की प्रेरणा देता है।

हमें इस पर्व को स्वच्छता और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए ताकि सभी लोग इसकी खुशियाँ मना सकें। बच्चों के लिए यह त्योहार विशेष रूप से आनंददायक होता है और उनके लिए यह सद्भाव, समृद्धि और आध्यात्मिकता की सीख प्रदान करता है।

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